(संजय कौशिक से)मोतिहारी , जून 05 -- बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के पताही स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने ऐतिहासिक 'घोड़दौर पोखर' के जीर्णोद्धार एवं पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना विभागीय शिथिलता और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण तय समयावधि पूरी होने के बाद भी अधूरी पड़ी हुई है।

मिथिला के राजा शिव सिंह की गौरवशाली विरासत माने जाने वाले इस ऐतिहासिक जलाशय को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए स्वीकृत 9.31 करोड़ रुपये की परियोजना धरातल पर अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है।

इतिहास और लोककथा से जुड़ा यह पोखर 15वीं शताब्दी में राजा शिव सिंह ने निर्मित कराया गया था। जनश्रुति के अनुसार गंभीर बीमारी से स्वस्थ होने के बाद राजा ने यहां विशाल यज्ञ कराया और अपने प्रिय घोड़े को खुला छोड़ दिया। घोड़ा जितनी दूरी तक दौड़ा, उतनी लंबाई में इस पोखर का निर्माण कराया गया। इसी कारण इसका नाम 'घोड़दौर पोखर' पड़ा। आज भी इस क्षेत्र में दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों की मौजूदगी के कारण भारत और नेपाल के वैद्य यहां पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 24 दिसंबर 2024 की प्रगति यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी थी। वर्षों से इस धरोहर को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे प्रो. राम निरंजन पांडेय, श्याम निरंजन पांडेय तथा पत्रकार प्रकाश सिंह समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों को उस समय बड़ी सफलता माना गया था। लेकिन डेढ़ वर्ष बीतने के बावजूद परियोजना की प्रगति नगण्य बताई जा रही है।

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