बेंगलुरु , अक्टूबर 15 -- सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी विप्रो को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में समेकित आधार पर 3,199.7 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है जो पिछले साल की समान तिमाही से 1.92 प्रतिशत कम है।
कंपनी का मुनाफा मुख्य रूप से नये श्रम कानून लागू होने के बाद कर्मचारियों के हितों के मद में खर्च बढ़ने से प्रभावित हुआ है।
विप्रो के निदेशक मंडल की गुरुवार को हुई बैठक के बाद जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए वित्तीय परिणामों की घोषणा की गई। तिमाही के दौरान कंपनी का समेकित राजस्व 7.88 प्रतिशत बढ़कर 25,508.2 करोड़ रुपये हो गया। वहीं कुल व्यय 9.98 प्रतिशत बढ़कर 21,312.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसमें अकेले कर्मचारी लाभ के मद में किया गया भुगतान 14,837 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले के 13,616.3 करोड़ रुपये से 8.96 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी ने बताया कि नये श्रम कानून लागू होने के बाद ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट के बने बकाये की मद में पिछले वित्त वर्ष के लिए उसने 2,756 करोड़ रुपये का भुगतान जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में किया है।
आईटी सेवाओं की श्रेणी से प्राप्त राजस्व 0.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 261.15 करोड़ डॉलर रहा। तिमाही दर तिमाही आधार पर कुल बुकिंग 22.9 प्रतिशत कम होकर 259.5 करोड़ डॉलर और बड़ी बुकिंग 58.6 प्रतिशत घटकर 67.4 करोड़ डॉलर पर रही।
परिदृश्य को लेकर कंपनी के बयान में कहा गया है कि वह 31 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही तीसरी तिमाही में आईटी सेवाओं से प्राप्त राजस्व 257.1 करोड़ डॉलर से 262.5 करोड़ डॉलर के बीच रहने की उम्मीद है। यह तिमाही-दर-तिमाही 1.5 प्रतिशत की गिरावट से 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्रीनि पल्लिया ने कहा कि कंपनी के रणनीतिक निवेश के परिणाम अब दिखने लगे हैं। इससे नये बाजार में पैठ बनाने, नये क्लाइंट जोड़ने और मौजूदा क्लाइंटों के साथ संबंध और प्रगाढ़ करने की कंपनी की क्षमता मजबूत होती है। उन्होंने कहा विप्रो एआई को दीर्घकालिक वृद्धि को गति देने वाला मानती है। इसका असर कंपनी के एआई-नेटिव यूनिट और एआई पोर्टफोलियो में दिखना शुरू हो गया है।
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