पटना , फरवरी 03 -- बिहार विधानसभा में मंगलवार को विपक्ष ने पटना में कथित नीट छात्रा हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से कराने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने निचले सदन के सदस्यों को आश्वस्त किया कि नीट हत्याकांड में निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
अध्यक्ष ने विधायक अरुण कुमार के स्थगन प्रस्ताव को खारिज करते हुए सदन की पूर्वाह्न बैठक के दौरान सदस्यों से सरकार पर भरोसा रखने की अपील की और कहा कि नीट हत्याकांड से जुड़े मामले में कार्रवाई अवश्य होगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर अरुण कुमार के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, लेकिन उन्हें अपना नोटिस पढ़ने की अनुमति दी। नोटिस पढ़ते हुए अरुण कुमार ने मांग की कि अत्यंत संवेदनशील नीट हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश से, एक निश्चित समय-सीमा के भीतर और न्यायालय की निगरानी में कराई जाए।
अरुण कुमार ने कहा कि जहानाबाद जिले के पतिआमा गांव की रहने वाली छात्रा के साथ पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुए जघन्य दुष्कर्म एवं हत्या की घटना एक गंभीर जन मुद्दा है, जिस पर सदन में विशेष चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने राज्य की राजधानी पटना के एक निजी कोचिंग संस्थान में औरंगाबाद की छात्रा की हत्या का मामला भी उठाया।
श्री कुमार ने कहा कि यह मामला छात्राओं की सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, जिसने पुलिस और प्रशासन की विफलता को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस प्रकरण में प्रभावशाली लोगों को संरक्षण दे रहा है।
विधायक श्री कुमार ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए, भले ही इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई हो, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर कराई जाए।
श्री कुमार ने पूरे मामले पर सदन में विशेष बहस कराने की भी जोरदार मांग की। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को आश्वस्त किया कि इस मामले में निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले इस मुद्दे को उठाते हुए विपक्षी सदस्यों ने तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उल्लेखनीय है कि पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक निजी हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ कथित रूप से दुष्कर्म किया गया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसे 6 जनवरी को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। मृत छात्रा मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रही थी।
पुलिस ने शुरुआत में पुलिस ने मौत की वजह अधिक मात्रा में नींद की गोलियां खाना बताया और उसे आत्महत्या की कोशिश कहा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अस्पताल में भर्ती होने से पहले छात्रा के साथ यौन शोषण की संभावना से इनकार नहीं किया गया। इसके बाद भारी हंगामे के बीच छात्रा के अंतर्वस्त्र को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया, जिसमें मानव शुक्राणु के अंश पाए जाने की पुष्टि हुई।
नीट अभ्यर्थी छात्रा की मौत के बाद पुलिस की निष्पक्षता पर उठे सवाल और विवादों के बीच राज्य सरकार ने 31 जनवरी को इसमें सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
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