मुंबई , अक्टूबर 06 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्षी दलों पर छात्र आंदोलनों की आड़ में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने, लोकतांत्रिक प्रणालियों की वैधता पर सवाल उठाने और कट्टरपंथी वामपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया हैं।

श्री फडणवीस ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य के कई अहम मुद्दों पर बात करते हुए मुंबई पुलिस का मजबूती से बचाव किया और जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बारे में विपक्ष के दावों को खारिज किया। उन्होंने सूखे से प्रभावित इलाकों के लिए त्वरित प्रशासनिक राहत की रूपरेखा का जिक्र करते हुए राजनीतिक घटनाक्रमों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया।

उन्होंने मुंबई कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए स्थानीय पुलिस बल की तारीफ की और कहा कि वे पूरी तरह से पेशेवर हैं और नागरिकों को मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि छात्रों की शिकायतें जायज हैं और सरकार सक्रिय है, लेकिन एनएसयूआई जैसे संगठन राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर आंदोलनों को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को हटाने की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता रोहित पवार की मांगों पर कहा कि अध्यक्ष को हटाना संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत होता है, न कि कार्यकारी अधिकारियों की मर्जी से। उन्होंने उन अधिकारियों को निशाना बनाने के तर्क पर सवाल उठाया जो पिछले पेपर लीक के समय पद पर नहीं थे, लेकिन कहा कि फिर भी प्रशासन ने उम्मीदवारों का भरोसा जीतने के लिए राज्यपाल से एक समिति बनाने की सिफारिश की है।

श्री फडणवीस ने चेतावनी दी कि बुनियादी लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता में अविश्वास पैदा करने की जानबूझकर कोशिशें की जा रही हैं और आगाह किया कि कट्टरपंथी तत्व मानक लोकतांत्रिक ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आपदा प्रबंधन में सक्रियता पर जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय निरीक्षण दल 11 तारीख तक प्रभावित जिलों का दौरा करके जमीनी रिपोर्ट तैयार करेंगे और फसलों के सर्वेक्षण का काम रिकॉर्ड गति से किया जा रहा है।

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