नयी दिल्ली , जुलाई 22 -- विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

इससे पहले सुबह 11 बजे शून्यकाल भी नहीं हो सका था और कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी थी। मौजूदा मानसून सत्र का आज तीसरा दिन है, और सदन में अब तक कोई कामकाज नहीं हो सका है।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जैसे की सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी सदस्य अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गये और अपनी मांगों को लेकर हंगामा करने लगे। वे नीट पेपर लीक और उसके विरोध में आयोजित संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहे थे।

उपसभापति हरिवंश ने उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि जब देश की आजादी के 50 साल पूरे हुए थे तब सदन ने संकल्प लिया था कि किसी भी सूरत में प्रश्नकाल और शून्यकाल को बाधित नहीं होने देंगे। विपक्षी सदस्यों के उसके विपरीत व्यवहार से आम लोगों के लिए गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है।

विपक्षी सदस्य इसके बावजूद हंगामा करते रहे, और अंत में उपसभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले सुबह 11 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने का मौका दिया।

श्री खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी ने नियम 267 के तहत यह सवाल उठाया है कि छात्रों के साथ जिस तरह की पुलिस कार्रवाई की गयी है वह दर्दनाक है। उनके इतना कहते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोर-जोर से बोलना शुरू कर दिया जिसका विपक्ष के सदस्यों ने कड़ा प्रतिवाद किया।

इसी बीच, सदन में अव्यवस्था की स्थिति देखते हुए सभापति ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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