चेन्नई , मई 30 -- तमिलनाडु के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आर. विनोथ ने खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बदलाव लाने और केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को अमली जामा पहनाने के साथ-साथ नयी योजनाओं के परीक्षण में पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जतायी है।
उन्होंने राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार से मदद मांगी है। कृषि मंत्री ने फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति, धान के बीज उत्पादन पर वितरण अनुदान जारी रखने और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के तहत तमिलनाडु का केंद्रीय हिस्सा 255 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये करने की मांग की है।
यहां मीडिया को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार शाम आयोजित 'खरीफ अभियान-2026' के राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों से नवाजा गया राज्य है। यहां धान, दलहन, तिलहन, कपास, गन्ना, सब्जियां, फूल, फल, बागवानी फसलें, मसाले और औषधीय पौधों सहित विभिन्न प्रकार की खेती की जाती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव के लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य के कुल किसानों में से लगभग 93 प्रतिशत छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं और वे कुल कृषि भूमि के 62 प्रतिशत हिस्से पर खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि धान तमिलनाडु की मुख्य फसल है। राज्य के कुल बोये जाने वाले क्षेत्र के 35 प्रतिशत हिस्से पर धान की ही खेती होती है, क्योंकि 20 लाख से अधिक किसान धान उगाते हैं और उनकी पूरी आजीविका इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
श्री विनोथ ने कहा कि केंद्र सरकार गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन और वितरण के लिए सहायता देकर धान किसानों की मदद करती रही है। इस योजना का लाभ सबसे ज्यादा किसानों को मिलता था।
कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के समग्र विकास के मकसद से चलायी जा रही 'राष्ट्रीय कृषि विकास योजना' (आरकेवीवाई) और 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन' के तहत धान के बीज उत्पादन और वितरण पर मिलने वाली अनुदान सहायता को बंद करने के केंद्र के फैसले से किसानों में बेचैनी पैदा होगी। कृषि मंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस फैसले पर दोबारा गौर करने की अपील की और कहा कि कम से कम वितरण अनुदान देना चाहिए, ताकि किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सके।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में कृषि मजदूरों की भारी किल्लत है, जो बड़े पैमाने पर कृषि मशीनीकरण को अपनाने के लिए मजबूर करती है। हालांकि इस मामले में केंद्र सरकार का सहयोग बहुत शानदार रहा है, लेकिन अब उसने ट्रैक्टर और कंबाइन हार्वेस्टर जैसी महंगी कृषि मशीनरी के लिए बजट को 25 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। ये मशीनें न केवल समय पर खेती के कामों को पूरा करने के लिए ज़रूरी हैं, बल्कि छोटे और सीमांत किसान इन्हें किराये पर देकर अतिरिक्त आजीविका हासिल करते हैं।
उन्होंने कहा, "इसलिए मेरा अनुरोध है कि 'कृषि मशीनीकरण उप-मिशन' के तहत इस सीमा में ढील देकर 35 प्रतिशत किया जाए।"इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के हित में केंद्र सरकार से पोटाश, अमोनियम सल्फेट और कॉम्प्लेक्स खादों की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने का अनुरोध करने के अलावा श्री विनोथ ने कहा कि तमिलनाडु बेहद प्रगतिशील राज्य है, जो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है। यह पानी की कमी से जूझ रहा राज्य भी है, जहां जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई को लागू करने जैसे गंभीर कदमों की जरूरत है।
केंद्र सरकार की तरफ से हालांकि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के लिए फंड का आवंटन घटाकर 90,000 हेक्टेयर कर दिया गया है। जबकि हमारे पास हर साल लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाने की गुंजाइश है।
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