मुंबई , जून 30 -- केंद्र सरकार की सार्वजनिक कंपनियों में विनिवेश की गति तेज हुई है और चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में विनिवेश से हुई प्राप्तियां पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की पूरी अवधि में इस मद में हुई कुल प्राप्तियों को पार चुकी हैं।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सरकार ने छह सार्वजनिक कंपनियों में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेची है। इससे उसे कुल 18,561 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं, पिछले पूरे वित्त वर्ष में छह कंपनियों में विनिवेश किया गया था जिससे सरकार को कुल 16,886 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश और सरकारी परिसम्पत्तियों के मौद्रीकरण से 80 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों से सार्वजनिक कंपनियों की हिस्सेदारी बेच कर राजस्व जुटाने के लक्ष्य को अलग से देना बंद कर दिया गया है। पिछले वित्त वर्ष में मौद्रीकरण से करीब 16,950 करोड़ रुपये मिले थे। इस प्रकार 2025-26 विनिवेश और मौद्रीकरण से कुल प्राप्ति 33, 837 करोड़ रुपये थी।
सरकार ने इस साल मई में दो और जून में चार सार्वजनिक कंपनियों की अपनी हिस्सेदारी बेची है। मई में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 8.08 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर उसने 2,266 करोड़ रुपये जुटाये। अब बैंक में उसकी हिस्सेदारी 81.19 फीसदी रह गयी है। कोल इंडिया के दो प्रतिशत शेयर मई में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के तहत बेचे गये। इससे सरकार को 5,542 करोड़ रुपये की आमदनी हुई और उसकी हिस्सेदारी घटकर 61.13 फीसदी रह गयी।
इस वर्ष जून में केंद्र ने एनएचपीसी की 6.01 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 4,357 करोड़ रुपये और एनएलसी इंडिया की 2.73 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 1,223.57 करोड़ रुपये कमाये। इन दोनों कंपनियों में अब उसकी हिस्सेदारी क्रमशः 61.39 प्रतिशत और 69.47 प्रतिशत बची है।
इसी तरह महीने जेनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर सरकार को 3,090 करोड़ रुपये और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन की 1.75 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 2,081 करोड़ रुपये मिले हैं। इस विनिवेश के बाद इन दोनों कंपनियों में केंद्र की शेष हिस्सेदारी क्रमशः 77.4 प्रतिशत और 82.9 प्रतिशत रह गयी है।
सरकार ने इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन की 1.71 फीसदी हिस्सेदारी पिछले साल भी बेची थी। शेयर बाजार में बिक्री की पेशकश ( ओएफएस) के जरिये बिक्री के लिए प्रस्तुत किये गये इस कंपनी के शेयरों के लिए दोनों साल निवेशकों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला । इसी तरह एनएलसी इंडिया का ओएफएस भी निवेशकों को लुभाने में विफल रहा। इसके विपरीत कोल इंडिया, एनएचपीसी और जेनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन के विनिवेश कार्यक्रम को निवेशकों का जोरदार समर्थन मिला।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित