उदयपुर , जनवरी 14 -- राजस्थान में उदयपुर-ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने ढलती उम्र में एम ए (अधिस्नातक) की परीक्षा में बैठकर यह साबित कर दिया कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती है।

उनहत्तर वर्षीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक मीणा ने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय से एमए (अधिस्नातक) अंतिम वर्ष की परीक्षा देकर समाज के सामने एक मिसाल कायम की है। महज 15 वर्ष की उम्र में पढ़ाई से दूर हो चुके श्री मीणा ने करीब 40 वर्षों बाद दोबारा शिक्षा का सफर शुरू किया। इस संकल्प के पीछे उनकी जीवनसंगिनी शांतिदेवी और उच्च शिक्षित पांच बेटियों की प्रेरणा रही, जिन्होंने उन्हें दोबारा किताबों की ओर लौटने का हौसला दिया।

श्री मीणा ने बुधवार को बताया कि स्वच्छ राजनीति, सुशासन और विकास के लिए शिक्षित जनप्रतिनिधि होना आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने राजनीति को ही अपने अध्ययन का विषय चुना और मास्टर डिग्री हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने आगामी बोर्ड और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा और मानव कल्याण के लिए संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जरूरी है। चुनौतियों से डरना नहीं चाहिए और असफलता के कारण आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को समाज से जड़ से समाप्त किया जाना चाहिए।

विधायक की शैक्षणिक यात्रा में सहयोगी रहे प्राचार्य संजय लूणावत ने बताया कि जनप्रतिनिधि होने की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद विधायक मीणा क्षेत्र भ्रमण के दौरान कार में ऑडियो व्याख्यान सुनते, नोट्स पढ़ते और निरंतर अध्ययन में जुटे रहते हैं। उनका जोश, जज्बा और अनुशासन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

लगातार तीसरी बार निर्वाचित विधायक फूलसिंह मीणा राजस्थान विधानसभा के स्पीकर पैनल के सदस्य हैं। वे विधानसभा की जनजाति कल्याण समिति के दूसरी बार सभापति भी हैं और आरएससीईआरटी की गवर्निंग काउंसिल में भी शामिल हैं। विधानसभा में सर्वाधिक प्रश्न पूछने वाले विधायकों में उनका नाम शतकवीर के रूप में दर्ज है।

राधास्वामी सत्संग के अनुयायी और बाबाजी गुरिंदर सिंह जी ढिल्लों के शिष्य विधायक मीणा अपनी चुस्ती, अनुशासित जीवनशैली और सादे परिधानों के लिए भी पहचाने जाते हैं।

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