बेंगलुरु , जून 13 -- कर्नाटक में 18 जून को होने वाले विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों से पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस ने महत्वपूर्ण सातवीं सीट के लिए जारी कड़े मुकाबले में क्रॉस-वोटिंग के डर से अपने विधायकों को एक निजी रिसॉर्ट में स्थानांतरित कर दिया है।

इस कदम ने उच्च सदन के एक सामान्य चुनाव को राजनीतिक थ्रिलर में बदल दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार खुद को एक ऐसी रणनीति के केंद्र में पा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल उन्होंने कर्नाटक के पिछले राजनीतिक संकटों के दौरान अक्सर किया है।

अंतिम सीट के लिए कांग्रेस और जेडीएस-भाजपा गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने के कारण पार्टी के रणनीतिकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं कि विधायक एकजुट रहें और विरोधी खेमे की पहुंच से दूर रहें।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया है, क्योंकि नेतृत्व दलबदल या क्रॉस-वोटिंग के रूप में अंतिम समय में किसी भी अप्रत्याशित झटके से बचना चाहता है।

यह ताजा घटनाक्रम केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जेडीएस की सातवीं परिषद सीट के लिए चुनावी मैदान में उतरने के बाद आया है, जिसने कांग्रेस के समीकरणों को बिगाड़ दिया है और एक कड़ा नंबर गेम शुरू कर दिया है।

विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर अपने ही विधायकों पर भरोसा न होने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि रिसॉर्ट में रुकना महज एहतियाती कदम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला श्री शिवकुमार के लिए दांव पर लगी बड़ी प्रतिष्ठा को दर्शाता है, जो मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद अपनी पहली बड़ी चुनावी परीक्षाओं में से एक का सामना कर रहे हैं।

इसमें जीत से कांग्रेस के भीतर उनका दबदबा मजबूत होगा और एक कुशल रणनीतिकार के रूप में उनकी साख फिर से स्थापित होगी।

हालांकि हार श्री कुमारस्वामी को एक बड़ी राजनीतिक बढ़त दिला देगी और सत्तारूढ़ दल की आंतरिक एकजुटता पर असहज करने वाले सवाल खड़े कर देगी।

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