नैनीताल , मई 29 -- उत्तराखंड विधानसभा से हटाये गये तदर्थ कर्मियों के मामले में उच्च न्यायालय में पुनः सुनवाई शुरू हो गई है। न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है।
विधानसभा से हटाये गये सौ से अधिक कार्मिकों की ओर से इसे चुनौती दी गई है। आज कार्मिकों की ओर से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता देवदत्त कामत जबकि विधानसभा की ओर से आनंद मोहन तिवारी की ओर से बहस की गई।
इस मामले में आज भोजनावकाश के बाद दूसरे सत्र में पूरी सुनवाई हुई। आज बर्खास्त कार्मिकों की ओर से अपना पक्ष रखा गया। श्री कामत की ओर से कार्मिकों का पक्ष रखते हुए कहा गया कि यह मामला एक बार जनहित याचिका में निर्णीत हो चुका है। तब राज्य सरकार नियुक्तियों को वैध ठहरा चुकी है।
यह भी कहा गया कि प्रदेश सरकार की ओर तब अपना पक्ष रखते हुए कहा गया था कि विधानसभा को तदर्थ नियुक्ति का अधिकार है। इसलिए उन्हें गलत ठहराया जाना उचित नहीं है। दूसरी ओर विधानसभा की ओर से कहा गया कि तदर्थ नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट उल्लेख है कि उन्हें कभी भी सेवा से हटाया जा सकता है।
अंत में अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए दो जुलाई की तिथि तय कर दी। इस मामले में दो जुलाई को भोजनावकाश के बाद सुनवाई हो सकेगी। तय शुदा तिथि पर शुरू में बर्खास्त कार्मिकों की ओर से अपना पक्ष रखा जायेगा। इसके बाद विधानसभा की ओर से बचाव में तथ्य पेश किए जायेंगे।
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