नैनीताल , सितंबर 17 -- उत्तराखंड विधानसभा से बर्खास्त 228 तदर्थ कार्मिकों के मामले में उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई में गुरुवार को नया मोड़ आ गया है। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2016 से पहले तैनात 168 कार्मिकों से जुड़े दस्तावेज अदालती रिकार्ड लाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को इसकी अनुमति आज दायर प्रार्थना पत्र के माध्यम से तो नहीं दी लेकिन पूरक शपथपत्र के माध्यम से रिकार्ड में लाने की अनुमति दे दी है।
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की पीठ इस प्रकरण में सुनवाई कर रही है। सुनवाई अंतिम चरण में है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से बर्खास्त कार्मिकों का पक्ष रखा गया जबकि विधानसभा सचिवालय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद मोहन तिवारी की ओर से बहस की जा रही है।
आज याचिकाकर्ताओं की ओर से एक प्रार्थना पत्र देकर वर्ष 2016 से पहले नियुक्त कार्मिकों से जुड़े दस्तावेज अदालत के समक्ष लाने की मांग की गयी। विधानसभा सचिवालय की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता मामले को उलझाना चाहते हैं और बिलंवित करना चाहते हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मांग को इस आधार पर खारिज कर दिया कि प्रार्थना पत्र अदालती कार्रवाई का हिस्सा नहीं हो सकता है लेकिन उन्हें पूरक शपथपत्र के माध्यम से दो सप्ताह में इसे अदालती रिकार्ड में लाने की अनुमति दे दी। साथ ही विधानसभा सचिवालय को भी एक सप्ताह में आपत्ति दर्ज करने को कहा है। अदालत अब इस मामले में 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगी।
इसके साथ ही अदालत ने वादी और प्रतिवादी विधानसभा सचिवालय को सभी याचिकाकर्ताओं के संबंध में आवेदन, प्रार्थना पत्र तथा नियुक्ति संबंधी विवरण को लेकर एक व्यापक चार्ट अदालत में पेश करने को कहा है। अदालत इस मामले में अंतिम सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर, 2022 में विधानसभा सचिवालय ने कोटिया कमेटी की सिफारिश पर 228 तदर्थ कार्मिकों कोबाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद इन कर्मचारियों की ओर से बर्खास्तगी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। तभी से यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।
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