जयपुर , मई 03 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी की पहल से विधानसभा परिसर में नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका का अभिनव सृजन किया जा रहा है।
यह वाटिकाएं भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, प्राचीन ज्योतिषीय जान, आयुर्वेद चिकित्सा और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का सजीव उदाहरण बनेगी। इन वाटिकाओं का उद्घाटन डॉ. देवनानी पांच राज्यों के विधानसभाध्यक्षों के साथ पांच मई को सुबह 10 बजे करेंगे।
राजस्थान विधानसभा में इस नवाचार के मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम विधानसभा के अध्यक्ष साक्षी बनेंगे। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौजूद रहेंगे।
डॉ. देवनानी ने रविवार को बताया कि नक्षत्र वाटिका की अवधारणा भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों पर आधारित है। ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र का संबंध एक विशिष्ट वृक्ष से माना गया है। इसके लिए विधानसभा के दक्षिण भाग में दोनों पार्किंग के मध्य पांच हजार वर्ग मीटर अर्ध चन्द्राकार उद्यान विकसित किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस वाटिका में 27 नक्षत्रों अश्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगसिर, आर्दा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल. पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती से संबंधित प्रमुख वृक्षों क्रमशः कुचला, आंवला, गूलर, जामून, खैर, शीशम, बांस, पीपल, नागकेसर, बरगद/बट, पलाश, पाकड, रीठा, चमेली, बेल, अर्जुन, कटारी, मौलश्री, चीड/संभल, साल, जलवेतर/अशोक, कटहल, शमी/आक, मदार/शमी, कदंब, आम, नीम, महुआ का रोपण किया जा रहा है। इन पौधों का नौ ग्रहों, बारह राशियों और त्रिदेव ब्रह्मा. विष्णु एवं शिव से भी संबंध है।
डा देवनानी ने बताया कि विधानसभा परिसर में आठ सौ पचास वर्ग मीटर में हर्बल वाटिका भी विशेष रूप से विकसित की गई है। इसके लिए विधानसभा के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में सुव्यवस्थित 38 क्यारियों में 38 प्रजातियों के पौधे लगाये जा रहे हैं। प्रत्येक क्यारी में एक प्रजाति के 20 से 25 पौधों का रोपण किया जा रहा है।
उन्होेंने बताया कि औषधीय पौधों में रोजमेरी, लौंग, समुद्र बेल, अजवाइन, बैजंती, पेपर-मिन्ट, पचोली, इंसुलिन, मेहंदी, पत्थर चट्टा, ओडोमास, केशवर्धनी, अश्वगंधा, सिट्रोनेला, कालमेघ, अग्रिमन्थ, हटजोड, ऐलोविरा (ग्वारपाटा), लेमनग्रास, वेटिवर ग्रास (खस), वेखंड (स्वीट फ्लैग), तुलसी, इलायची, पिपली, कपूर, गुज, दन्ती, मरवा, अक्कड काडा, स्टीविया, अजावृक्ष, सतावरी, रतनजोत. निरगुडी, रेड अडुसा (लाल वासा), सर्पगंधा, पान या नागरबेल और ब्रहमी शामिल है, जो आयुर्वेदिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. देवनानी ने बताया कि यह वाटिकाएं केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी. बल्कि लोगों को अपने जन्म नक्षत्र से जुड़े वृक्षों के प्रति जागरूक भी करेगी। उन्होंने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णित इन आयुर्वेदिक वृक्षों के संरक्षण से आमजन को समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।
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