नयी दिल्ली , अगस्त 11 -- दिल्ली विधानसभा ने नागरिकों को सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा के भीतर और आसानी से उपलब्ध कराने से संबंधित 'दिल्ली (नागरिकों का समय-सीमा के भीतर सेवाएं देने और आसानी से सेवाएं पाने का अधिकार) विधेयक, 2026' मंगलवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
दिल्ली के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि नया कानून सरकारी सेवाओं में देरी, दफ्तरों के चक्कर लगाने और जवाबदेही की कमी की व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने 11 वर्षों तक दिल्ली पर शासन किया और बुनियादी नागरिक एवं प्रशासनिक समस्याओं का समाधान नहीं कर सके, उन्हें मौजूदा सरकार को सुशासन का पाठ पढ़ाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र विकासपुरी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी वर्ष 2014 के सीवर टेंडर को संशोधित करना पड़ रहा है। उन्होंने वर्ष 2017-18 में खरीदी गयी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सहित विभिन्न विभागों से संबंधित कैग की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में सामने आयी कमियों के लिए जिम्मेदार लोग अब मौजूदा सरकार की प्रशासनिक सुधार की कोशिशों पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नया कानून नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत देगा। इसके तहत अधिसूचित सरकारी सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध करानी होंगी। नागरिक 'यूनिक एप्लीकेशन नंबर' के माध्यम से डिजिटल रूप से आवेदन कर सकेंगे और घर बैठे अपने आवेदन की स्थिति देख सकेंगे। तय समय-सीमा में सेवा नहीं मिलने पर आवेदन स्वतः वरिष्ठ अधिकारी के पास एस्केलेट हो जायेगा। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में अनावश्यक देरी और गलत तरीके से आवेदन खारिज करने की स्थिति में भी जवाबदेही तय की जायेगी।
उन्होंने कहा कि विधेयक में निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा नहीं देने पर संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गलत तरीके से आवेदन खारिज करने पर भी इसी तरह का जुर्माना लगाया जा सकता है, हालांकि संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा शिकायतों के निपटारे के लिए दो स्तर की अपील व्यवस्था होगी। पहली अपील वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष और दूसरी अपील दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन के समक्ष की जा सकेगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि यह कानून केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि नागरिक और सरकार के बीच भरोसा मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अब फाइल एक मेज से दूसरी मेज पर घूमती नहीं रहेगी, सेवाएं तय समय-सीमा में पूरी होंगी और सरकारी तंत्र को अपनी जिम्मेदारी का जवाब देना होगा।
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