जयपुर , जुलाई 01 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि विधानसभा केवल कानून बनाने वाला भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का जीवंत केंद्र और जनता से सीधे जुड़ा संस्थान होना चाहिए।

श्री देवनानी बुधवार को एक समाचार चैनल के 'मंच जयपुर' कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने विधानसभा की कार्यप्रणाली में किये गये विभिन्न सुधारों और नवाचारों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद उनका सबसे बड़ा उद्देश्य सदन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनसरोकारों से जुड़ा बनाना रहा है।

उन्होंने कहा कि जब वह पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे, तभी उनके मन में यह विचार था कि कार्यपालिका विधानसभा के प्रति अधिक जवाबदेह होनी चाहिए। साथ ही विधानसभा का आम जनता, विशेषकर युवाओं से भी सीधा जुड़ाव होना चाहिए। इसी सोच के तहत यूथ पार्लियामेंट जैसे कार्यक्रम शुरू किये गये, ताकि युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझें और उन्हें यह विश्वास मिले कि वे भी भविष्य में इस सदन का हिस्सा बन सकते हैं।

श्री देवनानी ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा चुनाव में लगभग आधे विधायक नये चुनकर आते हैं। ऐसे में सदन की प्रक्रिया, नियमों और संसदीय परंपराओं की जानकारी देना आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से पहली बार दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे नए विधायकों को विधानसभा की कार्यप्रणाली समझने में सुविधा मिले और वे प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विधायक केवल प्रश्न लगाकर सदन से बाहर न जाएं, बल्कि उन्हें समय पर जवाब भी प्राप्त हों। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला था, तब पिछली विधानसभा के करीब पांच हजार प्रश्नों के उत्तर लंबित थे। इसके बाद व्यवस्था में सुधार करते हुए यह तय किया गया कि एक सत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर अगले सत्र के शुरू होने से पहले उपलब्ध करा दिये जायें।

उन्होंने बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में 97 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर समय पर उपलब्ध कराये गये। वर्तमान सत्र के लगभग 65 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त हो चुके हैं और अगले सत्र के शुरू होने से पहले शत-प्रतिशत उत्तर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय की वे स्वयं अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक करते हैं।

श्री देवनानी ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गयी है, ताकि सदस्यों के प्रश्नों का प्रभावी उत्तर दिया जा सके।

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