दुर्ग , जुलाई 14 -- छत्तीसगढ़ में राज्य अतिथि शिक्षक विद्या मितान संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन आंदोलन के 13वें दिन राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों ने मंगलवार को विधानसभा घेराव के लिए पैदल मार्च निकाला। पुलिस ने जेल चौक पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जहां आगे बढ़ने के प्रयास के दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।
संघ के अनुसार अतिथि शिक्षक नियमितीकरण, समान काम के बदले समान वेतन, सेवा सुरक्षा तथा स्थायी रोजगार की मांग को लेकर धरना स्थल से विधानसभा की ओर रवाना हुए थे। जिला प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करते हुए जेल चौक पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई लेकिन सहमति नहीं बनने पर शिक्षकों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद उन्हें बैरिकेडिंग पर रोक दिया गया।
कांकेर की अतिथि शिक्षिका तुलसी कुमारी कश्यप ने बताया कि वह पिछले 11 वर्षों से दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि "बीस हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल है और उन्हें साल में केवल 10 महीने का ही वेतन मिलता है।" उनका कहना है कि "वर्षों की सेवा के बावजूद सरकार ने भविष्य सुरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।"संघ का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक गणित, विज्ञान, अंग्रेजी सहित विभिन्न विषयों की पढ़ाई वर्षों से करा रहे हैं। बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी शिक्षा व्यवस्था का बड़ा दायित्व इन्हीं शिक्षकों के कंधों पर है लेकिन अब तक उनके नियमितीकरण पर निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ के मुताबिक एक जुलाई से जारी हड़ताल के कारण कई शासकीय स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा सत्र के दौरान उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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