बिहार मक्का खरीद समीक्षापटना, फरवरी 05 -- बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने बृहस्पतिवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को चालू खरीद वर्ष में मक्के की अधिप्राप्ति (खरीद)की समीक्षा के निर्देश दिए।

श्री कुमार ने आज विधायक खुर्शीद आलम के मक्के के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और खरीद पर पूछे गए अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में खाद्य और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह के जवाब के बाद निर्देश दिये कि किसानों से मक्के की खरीद प्रणाली की समीक्षा की जाए।

विधायक खुर्शीद आलम ने आज विधानसभा सत्र के दौरान कहा कि राज्य के सभी 38 जिलों में पैक्स के माध्यम से किसानों के धान और गेहूं की खरीद एमएसपी पर की जाती है, लेकिन मक्के की एमएसपी निर्धारित नही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के नही होने की वजह से किसान अपनी मक्के की फसल सस्ते भाव में बेचने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार व्यापार मंडल और पैक्स दोनो मक्के की खरीद करते हैं, लेकिन ऐसा कोई उदाहरण नही है जिसमे पैक्स ने मक्के की खरीद की हो। उन्होंने कहा कि धान और गेहूं की तरह मक्के की खरीद भी पैक्स करे इसकी व्यवस्था की जाए।

श्री आलम के सवाल के जवाब में मंत्री श्रीमती सिंह ने कहा कि 2024-25 में सरकार ने मक्के की खरीद के लिए 2090 रुपये की एमएसपी निर्धारित की थी , लेकिन मक्के का बाजार भाव ज्यादा होने के कारण किसानों ने सरकारी खरीद में हिस्सा नही किया।

मंत्री ने कहा कि मक्के की मांग इथनॉल कम्पनियों की खरीद पर निर्भर करती है और चालू सत्र 2025-26 में जिस प्रकार की मांग इथनॉल कम्पनियां करेंगी, उसके अनुसार सरकार खरीद का फैसला करेगी। मंत्री के जवाब के बाद श्री आलम ने कहा कि एमएसपी प्रक्रिया से सरकार किसानों को सुविधाजनक बाजार उपलब्ध कराती है और इसको इथनॉल कम्पनियों की खरीद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मक्के की फसलों की कटाई तीन महीने तक होती है, इललिये एमएसपी से खरीद की अवधि भी एक महीने से बढ़ा कर तीन महीने कर देनी चाहिए।

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