कोंडागांव , जुलाई 10 -- छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में स्थानीय लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा से जोड़ने की मांग को लेकर बस्तर विकास एवं सेवा संस्थान द्वारा संचालित बस्तर संस्कृति ग्रुप (लोकरंग) के संयोजक सिद्धार्थ महाजन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम पत्र भेजा है। पत्र की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित की गई है।

श्री साय को लिखे गये पत्र में राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में लोक संस्कृति, लोककलाओं, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय त्योहारों पर नियमित जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराने की मांग की गई है।

पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है लेकिन बदलती जीवनशैली और आधुनिक तकनीक के प्रभाव से नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होती जा रही है। ऐसे में विद्यालय स्तर पर सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।

श्री महाजन ने सुझाव दिया है कि विद्यालयों में हरेली, पोला, तीजा, छेरछेरा, मड़ई, बस्तर दशहरा, नवाखाई और गोंचा जैसे प्रमुख पर्वों का महत्व विद्यार्थियों को बताया जाए। साथ ही पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा, गेंड़ी, पंडवानी, ददरिया, लोकगीत, ढोकरा शिल्प तथा बांस एवं लकड़ी की हस्तकलाओं सहित जनजातीय संस्कृति का व्यावहारिक परिचय भी कराया जाए।

पत्र में विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ तथा देश के वीर शहीदों और महान विभूतियों के जीवन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में प्रतिमाह "अपनी संस्कृति-अपनी पहचान" विषय पर सांस्कृतिक परिचय कार्यक्रम, लोक कलाकारों के व्याख्यान, लोककला प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं तथा जनजातीय संस्कृति आधारित गतिविधियां आयोजित करने की मांग की गई है। इससे विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को बढ़ावा मिलेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित