पुणे , अगस्त 08 -- महाराष्ट्र में पुणे पुलिस के संयुक्त आयुक्त संजय दराडे ने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया का उपयोग रचनात्मक रूप से करने तथा उनसे साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है।
श्री दराडे ने एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) में शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं के उन्मुखीकरण कार्यक्रम 'शुभारंभ 2026' में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को भड़काऊ संदेशों के आदान-प्रदान से बचना चाहिए और ऑनलाइन क्या खोजते हैं, साझा करते हैं और आगे बढ़ाते हैं, इस पर सावधानी बरतनी चाहिए।
ज़िम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग और इंटरनेट सुरक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री दराडे ने कहा, "इंटरनेट के उपयोग से कई लाभ मिलते हैं, लेकिन इसमें महत्वपूर्ण जोखिम और नुकसान भी शामिल हैं।" उन्होंने छात्रों को डिजिटल अरेस्ट स्कैम, "ट्राई फोन" स्कैम, पार्सल स्कैम, सेक्सटॉर्शन, टास्क और अंशकालिक नौकरी धोखाधड़ी, शेयर बाजार से जुड़ा घोटाला, ऋण एप घोटाला और डेटिंग धोखाधड़ी सहित साइबर धोखाधड़ी के विभिन्न रूपों से आगाह किया।
श्री दराडे ने छात्रों को मादक पदार्थों से दूर रहने और नशीले पदार्थों के सेवन के खतरों के प्रति सतर्क रहने की भी सलाह दी।
यह कार्यक्रम एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था।
पुणे पुलिस की अतिरिक्त आयुक्त तेजस्वी सातपुते, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. दत्ता डांगडे और कुलसचिव प्रो. गणेश पोकले उपस्थित लोगों में शामिल थे।
श्री दराडे ने कहा कि विश्वविद्यालय आध्यात्मिकता को विज्ञान के साथ जोड़ने तथा छात्रों को समानता, मानवता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान के मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बढ़ती हिंसा से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों को तैयार किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं के मूल्यों और चरित्र के विकास में विश्वविद्यालय सहायता करता है।
श्री पोकले ने विश्वविद्यालय द्वारा की गयी शैक्षणिक और सामाजिक पहलों पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों से अपने शैक्षणिक वर्षों के दौरान अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह किया।
सुश्री सातपुते ने कहा कि सफलता के लिए समग्र विकास की आवश्यकता होती है, जिसमें छात्रों को भावनात्मक लचीलेपन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ शारीरिक तथा मानसिक शक्ति का निर्माण करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार और दयालु व्यक्तियों के विकास के लिए नैतिकता, ईमानदारी, सहानुभूति और भावनात्मक बुद्धिमत्ता जैसे मूल्य आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि युवा तेजी से सक्षम और बुद्धिमान हो रहे हैं, फिर भी तनाव, चिंता और अवसाद भी उनके बीच बढ़ती चिंताओं के रूप में उभर रहे हैं।
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