जयपुर , अक्टूबर 23 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा है कि कथित विदेशी संगठनों से संपर्क, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक समूहों के साथ बैठकों, समझौतों और विरोध-प्रदर्शनों की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस को चुप्पी तोड़नी चाहिए।
श्री राठौड़ ने शुक्रवार को यहां जारी एक अपने बयान में कहा कि देश की जनता जवाब चाहती है और कांग्रेस नेतृत्व को सवालों से बचने के बजाय तथ्यों एवं दस्तावेजों के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना होगा कि विदेशी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों का उद्देश्य क्या था, किन विषयों पर चर्चा हुई और क्या समझौता किया गया।
उन्होंने कहा कि दस जनपथ पर कांग्रेस नेता श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी की प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई मुलाकात के संदर्भ में कांग्रेस को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। जनता जानना चाहती है कि इस बैठक का एजेंडा क्या था, चर्चा किन मुद्दों पर हुई और क्या इस संगठन का कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी के कार्यालय अथवा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के साथ कोई समझौता है। यदि सब कुछ स्पष्ट और नियमों के अनुरूप है, तो कांग्रेस को तथ्य सार्वजनिक करने में संकोच क्यों होना चाहिए।
श्री राठौड़ ने कहा कि देश की राजनीति में विदेशी प्रभाव, आर्थिक सहायता और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संभावित संबंधों को लेकर उठने वाले सवालों की अनदेखी नहीं की जा सकती। विरोध-प्रदर्शनों के फंडिंग को लेकर भी कांग्रेस को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। इन प्रदर्शनों को कितनी विदेशी सहायता मिली है। जो सहायता मिली है, उसका स्रोत, स्वरूप और उद्देश्य क्या है। इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि प्रमाणित तथ्यों से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ वर्ष 2008 में हुए समझौतें के संबंध में भी देश के सामने स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए। उस समझौते का उद्देश्य क्या था, उसमें किन विषयों को शामिल किया गया था और उसके तहत क्या प्रतिबद्धताएं व्यक्त की गई थीं, इन सवालों पर पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है।
श्री राठौड़ ने कहा कि हमारा लोकतंत्र किसी राजनीतिक परिवार की सुविधा से नहीं, बल्कि संविधान, कानून और जनता के जनादेश से चलता है। संसद, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाएं देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के मजबूत स्तंभ हैं। इन संस्थाओं की गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा करना प्रत्येक राजनीतिक दल का दायित्व है। राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने की छूट किसी को नहीं है।
श्री राठौड़ ने कहा कि श्री राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे देश के आंतरिक मामलों से जुड़े मुद्दों पर भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं को सर्वोपरि मानते हैं या नहीं। भारत की समस्याओं का समाधान भारत की संसद, न्यायपालिका, संवैधानिक व्यवस्था और देश की जनता के जनादेश के माध्यम से ही होना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित