शिमला , मार्च 21 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि राज्य में गंभीर वित्तीय संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा अगले छह महीनों के लिए टाल दिया जाएगा।
श्री सुक्खू शनिवार को बजट पेश करते हुए कहा कि वित्तीय संकट से निपटने के लिए वेतन को अस्थायी रूप से टालने जैसे कड़े फैसले भी लिए गए हैं, ताकि ज़रूरी सेवाएं बाधित न हों और वित्तीय संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि विधायकों के वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा भी इसी अवधि के लिए टाल दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सभी बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, सलाहकारों, विशेष कर्तव्य पर तैनात अधिकारी (ओएसडी, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों के वेतन का 30 प्रतिशत तक हिस्सा भी छह महीनों के लिए टाल दिया जाएगा। इसी तरह सचिव से लेकर विभागों के प्रमुखों तक के अधिकारियों की सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा अगले छह महीनों के लिए रोक दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अतिरिक्त डीजीपी की सैलरी का 30 प्रतिशत हिस्सा भी छह महीनों के लिए रोक दिया जाएगा, जबकि पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से लेकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक तक के अधिकारियों की सैलरी का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी अवधि के लिए रोक दिया जाएगा। वन विभाग में, वन बल प्रमुख, पीसीसीएफ और एडिशनल पीसीसीएफ की सैलरी का 20 प्रतिशत हिस्सा भी छह महीनों के लिए रोक दिया जाएगा और इसमें जिला वन अधिकारी (डीएफओ) रैंक तक के अधिकारी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रुप-2 के राजपत्रित अधिकारियों की सैलरी अगले छह महीनों के लिए 30 प्रतिशत तक रोक दी जाएगी हालांकि, ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारियों की सैलरी का भुगतान पहले की तरह ही जारी रहेगा। सभी निगमों, बोर्डों और अन्य स्वायत्त संस्थाओं को भी इन सरकारी निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
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