मुंबई , मई 25 -- वित्तीय व्यवस्था में क्वांटम टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और इससे जुड़े जोखिम पर विचार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर अनिल प्रभाकर को समिति का संयोजक बनाया गया है। केद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में अतिरिक्त सचिव सुनील कुमार, भारतीय स्टेट बैंक के उप-प्रबंध निदेशक सतीश राव नागेश, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दिलीप असबे, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से समूह संयोजक वैज्ञानिक-जी मनोज कुमार जैन, भारतीय डाटा सुरक्षा परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक गोडसे और आईबीएम क्वांटम इंडिया के पूर्व प्रमुख पूर्व प्रमुख एल. वेंकट सुब्रमण्यम् को समिति का सदस्य बनाया गया है। आरबीआई के फिनटेक विभाग के मुख्य महाप्रबंधक सुवेंदु पति को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि समिति वित्तीय क्षेत्र में संभावित लाभों, जोखिमों और चुनौतियों का पता लगायेगी और उसका मूल्यांकन करेगी। वह क्रिप्टोग्राफी बिल ऑफ मैटेरियल्स (सीबीओएम) के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र की क्रिप्टोग्राफिक इन्वेंटरी का मूल्यांकन करेगी, क्रिप्टो एजिलिटी का आंकलन करेगी तथा उन महत्वपूर्ण प्रणालियों और प्रक्रियाओं की पहचान करेगी जो ऐसे खतरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

समिति को क्वांटम-सेफ क्रिप्टोग्राफी अपनाने के लिए उद्योग की तैयारी का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी भी दी गयी है, जिसमें विक्रेता उपकरणों और समाधानों की उपलब्धता, विस्तार क्षमता और परिपक्वता शामिल हो।

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