पटना , अगस्त 16 -- बिहार कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने बिहार सरकार की शिक्षा नीति की आलोचना करते हुए रविवार को कहा कि वित्तरहित और अनुदानित कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों को भी अंगीभूत कॉलेज के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।
श्री राठौड़ ने कहा कि सामान पाठ्यक्रम और एक ही तरह की शिक्षा प्रदान करने वाले वित्त रहित कॉलेजों को सरकार अपना सहयोगी उपक्रम तो मानती है, लेकिन उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पस्ट करना चाहिए कि इन कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को अंगीभूत कॉलेज के बराबर का वेतन और अन्य सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही है।
कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कह कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन 534 प्रखंडों के जगह केवल 211 प्रखंडों में ही डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है और शेष 323 प्रखंडों में स्थापित अनुदानित कॉलेज ही सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा होने के बावजूद इस कॉलेजों में शिक्षण कर रहे शिक्षकों को विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अनुरूप उचित सम्मान नहीं मिल रहा हैं।
श्री राठौड़ ने बिहार सरकार से मांग करते हुए कहा कि वित्तरहित और अनुदानित कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मियों को विश्वविद्यालय सेवा आयोग के तहत बहाल किए गए शिक्षकों के अनुरूप ही सुविधाएं और राज्य कर्मचारियों के अनुरूप शिक्षकेत्तर कर्मियों को सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करे। उन्होंने कहा कि राज्य में समान काम के लिए अलग अलग मानक बनाकर काम करने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को इस मुद्दे पर विचार करते हुए शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।
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