चेन्नई , अगस्त 29 -- तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग, अति पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के नीतिगत नोट से पेरियार, आंबेडकर और नेहरू के नाम हटाए जाने पर विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समेत सहयोगी पार्टी 'विदुथलाई चिरुथाइगल काची' (वीसीके) में गहरा असंतोष व्याप्त हो गया है, जबकि राज्य सरकार के इस कदम को मोदी सरकार के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इससे यह सवाल सहज ही उठने लगे हैं कि क्या विजय सरकार दक्षिणपंथी रुख अपना रही है, जबकि पेरियार और आंबेडकर तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के वैचारिक नायक हैं। गौरतलब है कि छात्रों को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और वामपंथी दलों से जुड़ने से रोकने वाले उस परिनियम (जिसे बाद में वापस ले लिया गया था) पर हुए विवाद के ठीक बाद यह घटना हुई है। इसने भाकपा, माकपा, कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से चल रही अल्पमत वाली विजय सरकार की आलोचना करने का एक और मौका दे दिया है।

तमिलनाडु विधानसभा के मौजूदा बजट सत्र में अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक विकास विभाग का नीतिगत नोट पेश किया गया, जिससे इन नेताओं के नाम गायब थे। गौरतलब है कि यह पिछले वर्षों के नीतिगत नोटों से बिल्कुल अलग है, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया। बहस का जवाब देते हुए मंत्री वी. संपत कुमार ने कहा कि टीवीके सरकार की नींव पेरियार के मुख्य विचार 'एवरीथिंग फॉर एवरीवन' पर रखी गई है। यह विडंबना है कि दलित नेता और सांसद थोल थिरुमावलवन की पार्टी वीसीके और आईयूएमएल विजय सरकार का हिस्सा हैं, जबकि वामपंथी दल बाहर से समर्थन दे रहे हैं।

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