चेन्नई , जून 16 -- तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र 18 जून से राज्यपाल के पारंपरिक अभिभाषण के साथ शुरू हो रहा है। इससे पहले सदन की कार्यवाही में विधायकों के आचरण और व्यवहार को लेकर मंगलवार को यहां एक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।
सत्तारूढ़ टीवीके के अधिकतर सदस्य पहली बार चुनकर आये हैं, इसलिए तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर की पहल पर विधानसभा सचिवालय ने उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं और आचरण की जानकारी देने के लिए इस दो दिवसीय परिचय सत्र कार्यक्रम का आयोजन किया है।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने किया। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण का खाका विधायकों को विधानसभा के भीतर प्रभावी ढंग से काम करने के तौर-तरीके समझाने के लिए तैयार किया गया है, जिससे वे बहस के नियम, बोलने के प्रोटोकॉल और सत्र के दौरान अनुशासन बनाये रखना सीख सकें। इन सत्रों में संवैधानिक और प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देशों के साथ-साथ इस बात की भी जानकारी दी जायेगी कि सदस्यों को सदन में क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।
इस बीच, सभा को संबोधित करते हुए खुद पूर्व मंत्री रहे विधानसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक इतिहास को समझने के अहमियत पर जोर दिया और नागरिकों को विधायी संस्थाओं के विकास के बारे में अधिक जानने के लिए पुस्तकालयों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने इस बात पर गौर किया कि कई लोग विधानसभा की समृद्ध विरासत से अनजान हैं और कहा कि इसके इतिहास का अध्ययन करने से लोकतांत्रिक मूल्यों तथा नागरिक जागरूकता को मजबूत करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि संस्थागत इतिहास के साथ जनता का जुड़ाव बढ़ने से नागरिकों और शासन प्रणाली के बीच की दूरी को पाटने में मदद मिलेगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि कानून निर्माताओं और जनता दोनों के लिए विधायी परंपराओं तथा प्रक्रियाओं की जानकारी आवश्यक है, जो एक अधिक जागरूक और जिम्मेदार लोकतंत्र सुनिश्चित करती है।
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