चेन्नई , जून 25 -- लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) में अपनी हिस्सेदारी कम करने के केंद्र सरकार के प्रस्तावित कदम पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनएलसीआईएल में तीन प्रतिशत हिस्सेदारी के विनिवेश के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

श्री मोदी को लिखे एक अर्ध-सरकारी पत्र में उन्होंने एनएलसीआईएल में सरकार की हिस्सेदारी को और कम किए जाने का विरोध किया।

श्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु का हमेशा से यह मानना रहा है कि एनएलसीआईएल में भारत सरकार की हिस्सेदारी को और कम नहीं किया जाना चाहिए। एनएलसीआईएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम, जो दशकों से किसी मेजबान राज्य के निरंतर समर्थन से स्थापित और विस्तारित हुए हैं, उन्हें पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व और नियंत्रण में ही रहना चाहिए। उन्होंने केंद्र से प्रस्तावित विनिवेश से जुड़े अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।

अधिसूचना के अनुसार, एनएलसीआईएल के तीन प्रतिशत तक के शेयरों की बिक्री की पेशकश के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी के प्रस्तावित विनिवेश के साथ आगे बढ़ने के केंद्र सरकार के फैसले पर तमिलनाडु ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सरकार सैद्धांतिक रूप से एनएलसीआईएल में भारत सरकार की हिस्सेदारी को और कम करने का कड़ा विरोध करती है।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा तमिलनाडु के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि एनएलसीआईएल अपनी उत्पत्ति, विकास और निरंतर संचालन के माध्यम से आंतरिक रूप से राज्य से जुड़ा हुआ है।

एनएलसीआईएल का मुख्यालय तमिलनाडु के नेवेली में है। इसके मुख्य लिग्नाइट खनन कार्य-माइन I, माइन I ए और माइन II और इसके प्रमुख लिग्नाइट-आधारित ताप विद्युत केंद्र यहीं स्थित हैं। श्री विजय ने कहा कि यह उद्यम कई दशकों में राज्य तंत्र के माध्यम से अधिग्रहित की गई भूमि पर, व्यापक प्रशासनिक सहायता, बुनियादी ढांचे के विकास, पुनर्वास उपायों और राज्य के लोगों के सहयोग से खड़ा किया गया है।

इसलिए, इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के भविष्य में तमिलनाडु की एक वैध और स्थायी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु सरकार का यह सुविचारित मत है कि एनएलसीआईएल केवल एक सूचीबद्ध कंपनी नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खनिज विकास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में लगी एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है।"मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार की हिस्सेदारी में और कमी ऐसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्यमों के सार्वजनिक स्वामित्व के संबंध में एक अवांछनीय मिसाल कायम करती है। यह तमिलनाडु और यहां के लोगों के दीर्घकालिक हितों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।

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