चेन्नई , अगस्त 27 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय तथा लोक निर्माण विभाग मंत्री आधव अर्जुन ने गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार याचिकाएं दायर हालिया विधानसभा चुनावों में उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनावी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की।

न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मी नारायणन ने दोनों नेताओं की जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बताया गया कि श्री विजय और श्री अर्जुन दोनों ने अपनी याचिकाएं दायर कर दी हैं। इसके बाद न्यायालय ने इन याचिकाओं को शुक्रवार (28 अगस्त) और सोमवार (31 अगस्त) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 25 अगस्त को दोनों नेताओं को चेतावनी दी थी और कहा था कि चुनावी जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग वाली याचिकाएं दायर करने में बार-बार समय मांगने के कारण उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। उस समय दोनों के वकीलों ने याचिका दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन न्यायाधीश ने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया और कहा था कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 86 के तहत चुनावी याचिकाओं का निपटारा छह महीने के भीतर किया जाना ज़रूरी है।

न्यायाधीश ने कहा, "न्यायालय को लोगों से कोई मतलब नहीं है, बस यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव याचिकाओं पर छह महीने के अंदर फैसला हो जाये।" इसके बाद श्री विजय और श्री अर्जुन के वकीलों ने बताया कि आवेदन तैयार हैं, लेकिन विधानसभा सत्र चलने की वजह से हस्ताक्षर लेने में थोड़ी देर हो गयी। उन्होंने न्यायालय को आश्वासन दिया कि याचिका दो दिन के अंदर दायर कर दी जाएंगी। उन्होंने न्यायालय से जुर्माना न लगाने का अनुरोध किया। न्यायालय ने उनकी बात मान ली और जुर्माना नहीं लगाया।

साथ ही सुनवाई 27 अगस्त तक के लिए टाल दी। इसी निर्देश के तहत, आज न्यायालय में उनकी चुनावी जीत को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की याचिकाएं दायर की गयीं।

श्री विजय के खिलाफ कुल चार याचिकाएं दायर की गयी हैं, जिनमें तीन चेन्नई के पेराम्बुर निर्वाचन क्षेत्र से उनकी जीत को चुनौती देने वाली और एक तिरुचिरापल्ली (त्रिची) ईस्ट सीट से उनकी जीत के खिलाफ है। वहीं, शहर के विल्लीवक्कम निर्वाचन क्षेत्र से श्री अर्जुन की जीत के खिलाफ दो याचिकाएं दायर की गयीं।

श्री विजय दो सीटों चेन्नई में पेराम्बुर और त्रिची ईस्ट से चुने गए थे। हालांकि, उन्होंने पेराम्बुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया और त्रिची ईस्ट से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उस सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया।

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