रायपुर , अक्टूबर 20 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक होने के साथ ही सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश देता है। भगवान श्रीराम के आदर्श हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पालन करने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।

साय आज राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हजारों लोगों की उपस्थिति में धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया तथा प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस प्रदेश का भगवान श्रीराम से गहरा आत्मीय संबंध है। छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ इस क्षेत्र के वनांचलों में समय बिताया था। भगवान श्रीराम के आदर्श प्रदेश की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में रचे-बसे हैं।

उन्होंने कहा कि रावण के पास अपार सैन्य शक्ति और संसाधन थे, जबकि भगवान श्रीराम ने वनवासियों और वानर सेना को संगठित कर विजय प्राप्त की। यह प्रसंग बताता है कि संसाधनों और बाहुबल से अधिक महत्वपूर्ण सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास हैं। रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी संदेश देता है कि अधर्म का साथ देने वालों को अंततः उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

साय ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण केवल उनकी आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को आचरण में उतारना है। कमजोर और जरूरतमंद का साथ देना, न्याय के पक्ष में खड़े होना तथा अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही रामराज्य की मूल भावना है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति देश की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के सभी क्षेत्रों में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वास और विकास के माध्यम से प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है।

साय ने कहा कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास का ऐतिहासिक अवसर था। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और लंबे समय से जुड़े संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत अब तक छत्तीसगढ़ के 49 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम में भगवान रामलला के दर्शन कर चुके हैं। राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

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