नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत ने पिछले करीब साढे तीन वर्षों में लड़ाकू विमानों की एक हजार सफल और सुरक्षित एरेस्टेड लैंडिंग कराकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। तेज गति वाले लड़ाकू विमानों को युद्धपोत के सीमित डेक पर उतरते समय सुरक्षित रूप से रोकने के लिए 'अरेस्टेड लैंडिंग' करायी जाती है जिसमें विमानों को पैराशूट के जरिये बल लगाकर रोका जाता है। आईएनएस विक्रांत के सोशल मीडिया हैंडल ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए इसे अविरल टीमवर्क, सटीक प्रशिक्षण और समुद्र में सतत युद्ध तत्परता का प्रमाण बताया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा गया है, " पहली रोशनी से शुरू होने वाली उड़ानों से लेकर देर रात की रिकवरी तक सफल 1000 ट्रैप्स । आईएनएस विक्रांत ने 1000 सुरक्षित एरेस्टेड लैंडिंग्स पूरी की हैं, जो अविरल टीमवर्क और युद्ध तत्परता का प्रमाण है।"एरेस्टेड लैंडिंग विमानवाहक पोत संचालन की एक महत्वपूर्ण विशेषता हैं, जो सीमित डेक क्षेत्र में उच्च गति वाले लड़ाकू विमानों को तेजी से रोकने में सक्षम बनाती हैं। सामान्य हवाई पट्टियों के विपरीत, विमानवाहक पोतों पर छोटी हवाई पट्टी उपलब्ध होती है, जिससे पारंपरिक लैंडिंग के लिए कोई जगह नहीं रहती। एरेस्टर वायर प्रणाली के बिना, विमानों का डेक से अधिक उड़ जाने की आशंका बनी रहती है। यह तंत्र समुद्र में, कठिन मौसम और लहरों के बीच भी निरंतर हवाई संचालन सुनिश्चित करता है।"इन विमानों के पायलटों के लिए यह कार्य अत्यधिक सटीकता और समयबद्धता की मांग करता है, क्योंकि उन्हें लगातार हिलते रहने वाले फ्लाइट डेक पर उतरना होता है। यही कारण है कि एरेस्टेड लैंडिंग नौसेना की विमानन में सबसे कठिन कौशलों में गिनी जाती हैं।
नौसेना के पश्चिमी बेडे के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल विवेक दहिया ने टीम विक्रांत और उनके एम्बार्क किए गए स्क्वाड्रनों की इस गौरवपूर्ण संचालन उपलब्धि की सराहना की।
नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस विक्रांत देश में अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसे दो सितंबर 2022 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। आईएनएस विक्रांत का नाम भारत के पहले विमानवाहक पोत, आईएनएस विक्रांत (आर11) से लिया गया है जिसे 1997 में सेवानिवृत्त किया गया था। कुल 76 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ, आईएनएस विक्रांत भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की मजबूत अभिव्यक्ति है।
कुल 262.5 मीटर लंबे और 61.6 मीटर चौड़े पोत का वजन लगभग 45,000 टन है और यह चार गैस टरबाइनों द्वारा लगभग 88 मेगावाट शक्ति उत्पन्न करता है। यह अधिकतम 28 समुद्री मील की गति से चलने में सक्षम है।
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