जयपुर , सितम्बर 24 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गांव, गरीब, युवा, महिला शक्ति और किसान राज्य सरकार की विकास परियोजनाओं के केन्द्र बिन्दु बताते हुए नगरीय क्षेत्रों के साथ गांव-ढाणी तक समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरु की गई योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन सुनिश्चित करने एवं सड़क, शिक्षा, चिकित्सा, पानी और बिजली सहित अन्य जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिये हैं।
श्री शर्मा गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित राज उन्नति की नौवीं बैठक में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं एवं विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमजन को योजनाओं एवं विकास कार्यों का समय पर लाभ मिले, इसके लिए स्वीकृति, निविदा तथा कार्यादेश समय पर जारी हों तथा इनको समय पर पूरा किया जाना सुनिश्चित करें। सभी प्रक्रियाओं को स्ट्रीमलाइन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजनाओं में अनावश्यक विलम्ब करने वाले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए। अधिकारी अपने दफ्तरों से बाहर निकलकर फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण करें। हर योजना की हर स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग हो और प्रशासन पूर्णतया आमजन से जुड़कर कार्य करे।
उन्होंने प्रदेश में पांच हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथों के निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि वर्ष 2025-26 के सभी शेष कार्य एवं वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण के प्रगतिरत कार्यों को नवम्बर 2026 तक पूरा किया जाए। वहीं, वर्ष 2026-27 के द्वितीय चरण के सभी निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराये जायें।
उन्होंने कहा कि अटल प्रगति पथों के निर्माण कार्यों की जिलेवार टाइमलाइन तय कर कार्यों की गुणवत्ता की भी निरंतर मॉनिटरिंग की जाए। इनका कार्य पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होने के साथ ही जनसुविधाओं तक आमजन की पहुंच सुगम हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा का स्तर और बेहतर करने के लिए स्कूल भवनों का पुनरुद्धार करने के साथ ही उनमें आधुनिक सुविधाओं का भी विस्तार करेगी। इस पर करीब 12 हजार 500 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक निवेश किया जा रहा है। इसके लिए सभी 41 जिलों के 65 हजार 308 राजकीय विद्यालयों का सघन तकनीकी सर्वे किया गया है। सर्वे के आधार पर प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 3 हजार 587 जर्जर स्कूल भवनों तथा करीब 71 हजार 78 कक्षा-कक्षों के साथ विद्युत, पेयजल एवं शौचालय जैसी सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता चिह्नित की गयी।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने स्कूलों में सुविधाओं के विकास के लिए तीन हजार 364 कार्य स्वीकृत किये हैं, जिन पर एक हजार 220 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। करीब दो हजार 500 करोड़ रुपये के पांच हजार कार्य प्रगतिरत हैं, जबकि 652 नये स्कूल भवनों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर निविदा प्रक्रिया में लिया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में 82 कार्यों में से 80 कार्य प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित विकास कार्यों को समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यालय अवसंरचना में सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। वर्ष 2018 से 2023 तक मात्र 2 हजार 287 करोड़ रुपये की राशि ही इस हेतु स्वीकृत की गयी थी। जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सितम्बर 2026 तक ही दो हजार 973 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं एवं आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किए जा रहे अटल ज्ञान केन्द्रों के कार्यों को गति प्रदान करने के निर्देश दिये। उन्होंने पंचायती राज विभाग को निर्देश दिए कि प्रथम चरण के शेष कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए तथा द्वितीय चरण के दो हजार अटल ज्ञान केन्द्रों की स्थापना की स्वीकृति शीघ्र जारी करें। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत मुख्यालयों में विकसित किए जा रहे ये केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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