रायपुर , दिसंबर 31 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज राजधानी रायपुर में कहा है कि मौजूदा दौर में विकास की दिशा पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। ऐसा कोई मॉडल अब तक सामने नहीं आया है, जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण बिना टकराव के साथ-साथ आगे बढ़ सके। ऐसे में समाज को संतुलित और टिकाऊ विकल्पों की ओर बढ़ना ही होगा।
तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान डॉ. भागवत आज रायपुर एम्स में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं से रू-बरू हुए। इस अवसर पर उन्होंने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए चेताया कि यदि विकास की रफ्तार बिना पर्यावरणीय सोच के जारी रही, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
सरसंघचालक ने कहा कि विकास और प्रकृति को विरोधी मानने के बजाय दोनों का समानांतर और संतुलित विस्तार जरूरी है। इसके लिए केवल नीतियों में बदलाव ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे करियर और रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझें और छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव की नींव रखें।
युवाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए डॉ. भागवत ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज का युवा भीतर से अकेलापन महसूस कर रहा है। परिवारों में संवाद की कमी और रिश्तों में भावनात्मक दूरी के कारण मोबाइल और नशा युवाओं के लिए आसान विकल्प बनते जा रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि परिवार के भीतर संवाद और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा, तो नकारात्मक आदतों की ओर युवाओं का झुकाव स्वतः कम होगा। समाज और परिवार को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहां युवा अकेलेपन से बचने के लिए नशे की ओर नहीं, बल्कि रचनात्मक और सार्थक गतिविधियों की ओर आगे बढ़ें।
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