देहरादून , अगस्त 19 -- देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को उत्तराखंड के देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के परिवीक्षार्थियों तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा अधिकारियों से कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि साथ-साथ चल सकते हैं।
उन्होंने 2025-2027 बैच को संबोधित करते हुए संरक्षण और विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका तथा वर्तमान आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का आग्रह किया।
श्री राधाकृष्णन ने व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता का आह्वान करते हुए कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही राष्ट्रों और संस्थानों का निर्माण करता है। उन्होंने पीढ़ियों से वनों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के साथ सामंजस्य में जीवन जीने वाले समुदायों द्वारा संचित पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने लोक सेवा में सत्यनिष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और कठिन निर्णयों में संविधान, कानून, विज्ञान तथा व्यापक जनहित का मार्गदर्शन होना चाहिये। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
उन्होंने वानिकी में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए नयी पीढ़ी के अधिकारियों से क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता के साथ रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा-आधारित प्रणालियों को समन्वित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के सतत भविष्य के निर्माण में आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत के सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा।
उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं और इसे एक उत्साहजनक बदलाव तथा नारी शक्ति का प्रमाण बताया। उन्होंने अधिकारियों को अपने करियर का आकलन केवल उनके द्वारा धारण किये गये पदों से न करने की सलाह देते हुए उनसे अपने योगदान का आकलन पुनर्स्थापित किये वनों, संरक्षित किये गये वन्यजीवों, जिन समुदायों का विश्वास उन्होंने अर्जित किया है और भावी पीढ़ियों के लिए छोड़ी गयी विरासत के आधार पर करने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक अजीता लोंगजाम तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
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