लखनऊ , मार्च 27 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य को विकसित श्रेणी में शामिल करने और ज्ञान व नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए 'विकसित यूपी-2047' विजन दस्तावेज का मसौदा तैयार कर लिया है।

यह दस्तावेज केंद्र के विकसित भारत 2047 के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की व्यापक रणनीति शामिल है। विजन दस्तावेज के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके बाद 2036 तक इसे दो ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की योजना है। इसके साथ ही राज्य को वैश्विक स्तर पर शीर्ष 11-12 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की भी परिकल्पना की गई है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्य को करीब 16 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। वर्ष 2023-24 में प्रदेश की जीएसडीपी वृद्धि दर 11.6 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 9.6 प्रतिशत से अधिक है।

राज्य का जीएसडीपी वर्ष 2017-18 में 12.89 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 27.51 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 31 मार्च 2026 तक इसके करीब 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। विजन दस्तावेज में प्रति व्यक्ति आय को वर्तमान 1.24 लाख रुपये से बढ़ाकर 2047 तक लगभग 25 लाख रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, देश के कुल निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को मौजूदा करीब 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है।

सामाजिक क्षेत्र में भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। राज्य की जनसंख्या वर्तमान 24.5 करोड़ से बढ़कर 2047 तक लगभग 29 करोड़ होने का अनुमान है। औसत आयु 70.1 वर्ष से बढ़ाकर 80 वर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है। साक्षरता दर, जो 2011 में 67.68 प्रतिशत थी, उसे 2047 तक 100 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है।विजन दस्तावेज के मुताबिक, राज्य में तेजी से शहरीकरण भी होगा। वर्ष 2011 में 24.31 प्रतिशत शहरी आबादी के मुकाबले 2047 तक यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इससे कृषि क्षेत्र से उद्योग और सेवा क्षेत्र में श्रम का स्थानांतरण होगा और उत्पादकता में वृद्धि होगी।

इस महत्वाकांक्षी योजना को तैयार करने में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई है। करीब 98 लाख सुझावों के आधार पर दस्तावेज तैयार किया गया है। राज्य सरकार ने नीति आयोग के साथ समन्वय कर विभिन्न विभागों और हितधारकों से विचार-विमर्श किया है।

शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सरकार नवाचार, कौशल विकास, रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार और कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

वहीं, उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने संकेत दिए कि अगले तीन से चार महीनों में इस विजन दस्तावेज को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि तय रणनीति के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश 2047 तक विकसित राज्य के रूप में उभरेगा और देश की अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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