मिर्जापुर 31अक्टूबर (वार्ता) मां विंध्यवासिनी की नगरी विंध्य धाम की मिट्टी से बने दीये की रौशनी से इस दीपावली प्रभु राम की तपोभूमि चित्रकूट जगमगाएंगी। दीपावली पर्व के मौके पर विंध्य क्षेत्र के कुम्हारों को कई जिलों से दीये सप्लाई करने के बड़े आर्डर मिले हैं । यहां से अब तक एक लाख दीये सप्लाई किए जा चुके हैं। श्रम का मूल्य एवं बाजार मिलने से माटीकला कारीगरों के चहरे पर रौनक है। स्थानीय बाजार के जानकारों का कहना है कि लोकल फार वोकल योजना से इस व्यवसाय को लाभ मिल रहा है।विंध्य के कुम्हारों के बनाए दीपकों की चित्रकूट, अयोध्या सहित कई अन्य जनपदों इस बात की ओर संकेत करती है। स्थानीय मिट्टी के उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ रही है। चाहे वे दीये हो या चुनार में बने पांटरी के खिलौने,जार,कप प्लेट आदि हो। मृतप्राय चुनार का मिट्टी के सामान इसी योजना से एक बार फिर अपनी पुरानी स्थिति की लौटने लगा है।अब यह विदेश मेंश्रीलंका और नेपाल में अपनी पहुंच बना लिया है।

चाक पर घूमती मिट्टी सिर्फ दीये नही गढ रही बल्कि स्वदेशी और आत्मनिर्भर की तस्वीर भी सवार रही है। दीपावली पर पारंपरिक कारोबार में नई उम्मीद जगी है।मेदी लाल वर्मा ने बताया कि अभी एक लाख दीये चित्रकूट भेजे गए हैं।इस बार करीब दस लाख दीये जनपद से बाहर भेजे जाएंगे। पिछली बार सात लाख की सप्लाई हुई थी।वे बताते हैं कि रोजाना बीस हजार दीये तैयार किए जा रहे हैं।हीरा लाल प्रजापति बताते हैं कि इस परम्परागत काम में जिले भर में पांच सौ से अधिक परिवार जुड़े हैं। श्री प्रजापति बताते हैं कि चूंकि यह सीजनल काम है। लिहाजा लोग महीनों पहले से जुट जाते हैं।

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