नयी दिल्ली , नवंबर 18 -- ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (एएसडीसी) की मंगलवार से यहां शुरू हुई तीन दिवसीय कौशल प्रदर्शनी में एक ट्राय-ए-स्किल जोन बनाया गया है जहां आगंतुक किसी कौशल विशेष में अपनी क्षमता आजमा सकते हैं।

यशो भूमि में लगी इस प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

प्रदर्शनी में वाहन प्रौद्योगिकी और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के भारतीय और वैश्विक मानकों पर आधारित कौशल कार्यों की प्रदर्शनी लगायी गयी है। इस प्रदर्शनी के पहले दिन ट्राय-ए-स्किल ज़ोन आगंतुकों के लिए आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र साबित हुआ, जहां युवाओं ने एआर वेल्डिंग और एआर पेंटिंग सिमुलेटर के जरिए वेल्डिंग और रंगाई कौशल की आजमाइश की। साथ ही ऑटो बॉडी रिपेयर तकनीकों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया ।

बीस नवंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कौशल प्रतियोगिताएं, वर्कशॉप और पैनल डिस्कशन शामिल हैं। एएसडीसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि तेजी से बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के बावजूद देश में प्रशिक्षित वेल्डरों की उपलब्धता कम है, जबकि पारंपरिक प्रशिक्षण में अधिक लागत की जरूरत होती है। ऐसे में एआर तकनीक आधारित प्रशिक्षण मॉडल एक सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।

एएसडीसी के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोटिव सेक्टर में कुशल वेल्डरों और ऑटोमोटिव पेंटर की भारी कमी है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से एएसडीसी यह दिखाना चाहता है कि कैसे एडवांस सिमुलेशन टूल्स से प्रशिक्षण देकर भविष्य के लिए तैयार कार्यबल उपलब्ध किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण में युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ रही है। एआर समाधान सीखने की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं और आज मिली शानदार प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि तकनीक आधारित स्किलिंग में रुचि तेजी से बढ़ रही है। एआर समाधान प्रशिक्षण लागत कम करते हैं, सुरक्षा बढ़ाते हैं और सीखने की गति तेज करते हैं, जो भारत की वोकेशनल एजुकेशन को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी है।

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