वाराणसी , नवंबर 7 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सात नवंबर को दो दिवसीय दौरे पर काशी पहुंचकर आठ नवंबर को सुबह वंदे भारत ट्रेन की सौगात देंगे। वाराणसी से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन से धार्मिक पर्यटन के साथ इको टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

शुक्रवार को खास बातचीत में टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया कि काशी आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु खजुराहो जाना चाहते हैं। काशी से खजुराहो जाने वाले पर्यटक और श्रद्धालु धार्मिक पर्यटन के साथ इको टूरिज्म के लिए भी सराहनीय कदम साबित होंगे। खजुराहो से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (टाइगर रिजर्व) नजदीक ही कुछ किलोमीटर पर है। दूसरी बड़ी बात यह है कि खजुराहो और टाइगर रिजर्व देखने लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। अब उन्हें काशी आने के लिए सीधे वंदे भारत ट्रेन भ्रमण के लिए मिल जाएगी।

श्री मेहता ने बताया कि तीसरी सबसे बड़ी बात यह है कि वाराणसी से चित्रकूट के लिए फास्ट ट्रेन नहीं थी। वाराणसी, विंध्याचल, प्रयागराज और चित्रकूट एक सर्किट के रूप में विकसित होगा। पर्यटन से जुड़े लोगों की कई सालों से वाराणसी से खजुराहो के बीच फास्ट ट्रेन की मांग थी। अब यह सपना कल साकार हो जाएगा। आने वाले समय में वंदे भारत ट्रेन की वजह से पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि देखने को मिलेगी।

वाराणसी-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस की सीधी कनेक्टिविटी से वर्तमान में संचालित विशेष ट्रेनों की तुलना में लगभग 2 घंटे 40 मिनट का समय बचाएगी। बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस भारत के धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो को जोड़ेगी। यह केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नया आयाम देगा।

इसके अलावा लखनऊ से सहारनपुर, फिरोजपुर से दिल्ली और एर्नाकुलम से बेंगलुरु जाने वाली अन्य स्थानों की तीन वंदे भारत एक्सप्रेस को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

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