वाराणसी , मई 30 -- धार्मिक नगरी काशी में योगी सरकार कठिरांव वेटलैंड (आर्द्रभूमि) को नया और सुरक्षित जीवन देने जा रही है। कुल 19.06 हेक्टेयर में फैले इस प्राकृतिक जल स्रोत को संरक्षित और विकसित करने की वैधानिक तैयारी पूरी कर ली गई है।

इस पहल का उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए मानव जीवन की गुणवत्ता को भी मजबूत करना है। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) को उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा वेटलैंड को "वेटलैंड प्रबंधन" नियमों के अंतर्गत अधिसूचित किए जाने का प्रस्ताव है। योगी सरकार का यह कदम वाराणसी के विकास को सतत दिशा देने वाला माना जा रहा है, जो आधुनिकता के साथ-साथ प्रकृति और मानव जीवन के सह-अस्तित्व को मजबूत करेगा।

प्रभागीय वन अधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग द्वारा कठिरांव वेटलैंड को "आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017" के अंतर्गत अधिसूचित किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए "कठिरांव वेटलैंड" का चयन किया गया है। वन विभाग ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आवश्यक अभिलेख और तकनीकी विवरण तैयार किए हैं, जिन्हें जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण से अनुमोदन भी मिल चुका है।

उन्होंने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद इस क्षेत्र को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा। इसके तहत वेटलैंड क्षेत्र में अतिक्रमण, ठोस अपशिष्ट फेंकना, प्रदूषण फैलाना, अवैध निर्माण और प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे न केवल जलधारण क्षमता और जैव विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वेटलैंड प्राकृतिक जल संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने, बाढ़ नियंत्रण, पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। कठिरांव वेटलैंड का संरक्षण स्वास्थ्य, आजीविका और पर्यावरण सुरक्षा से भी जुड़ा है।

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