बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़) , फरवरी 10 -- वित्तीय वर्ष 2014-15 में यहां की जनपद पंचायत वाड्रफनगर क्षेत्र के ग्रामों में मनरेगा के तहत होने वाले निर्माण कार्यों के फर्जी बिल बनाकर लगभग 30 लाख रुपये के गबन के मामले में कई वर्षों से फरार चल रहे पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रवण कुमार मरकाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार,आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (जालसाजी), 468 (साजिश रचकर जालसाजी), 409 (सरकारी सेवक द्वारा विश्वास भंग), 420 (ठगी) और 34 (सामूहिक इरादे से कार्य) के तहत मुकदमा दर्ज है।

गिरफ्तार आरोपी श्रवण कुमार मरकाम उर्फ एस.के. मरकाम (62) ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में जनपद पंचायत वाड्रफनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत तुगंवा, गुडरू, जमई और पेंडारी में मुरम मिट्टी, सड़क, सह पुलिया, तटबंध तथा डब्लूबीएम निर्माण जैसे मनरेगा कार्यों के फर्जी बिल तैयार कराए और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर करीब 30 लाख 2 हज़ार 449 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया।

मामले की शुरुआत तब हुई जब जनपद पंचायत वाड्रफनगर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ही 30 अप्रैल 2020 को एक जांच रिपोर्ट और दस्तावेज थाना बसंतपुर को सौंपे गए। इसके आधार पर पहले कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) अश्विनी कुमार तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान आरोपी तिवारी के साथ-साथ सप्लायर हरिहर यादव, कुजलाल साहू और रोजगार सहायक गिरीश यादव को भी गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ माननीय न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है।

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