इंफाल , मार्च 28 -- मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने शनिवार को यहां कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 143 गांवों का विकास किया जाएगा।

श्री सिंह ने आयोजित 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-II' पर एक दिवसीय राज्य-स्तरीय कार्यशाला में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 143 गाँवों को इस योजना के तहत शामिल करने के लिए चुना गया है, जिससे इन क्षेत्रों में सम्पर्क, बुनियादी ढाँचे और सेवाओं की आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-II' भारत सरकार की एक पहल है, जिसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे गांवों में बुनियादी ढांचे, आजीविका के अवसरों और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा देना है।

मणिपुर सरकार के योजना विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का विकास करना और विभिन्न विभागों तथा एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना था। चर्चा राज्य में इस कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन, उससे जुड़ी रणनीतियों और चुनौतियों पर केंद्रित रही।

भारत-म्यांमार सीमा पर मणिपुर की रणनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस कार्यक्रम के तहत राज्य के पांच जिलों तेंगनौपाल, कामजोंग, उखरुल, चंदेल और चुराचांदपुर को शामिल किया है।

उन्होंने समय पर और तालमेल के साथ योजना को लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और इसमें योजना विभाग, ज़िला प्रशासन और सुरक्षा बलों (जिनमें असम राइफल्स भी शामिल है) की भूमिका को अहम बताया। सबका साथ, सबका विकास के विज़न का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कार्यशाला आपसी तालमेल को मज़बूत करेगी और ज़मीनी स्तर पर बेहतर नतीजे सुनिश्चित करेगी।

इस दौरान मुख्य सचिव डॉ. पुनीत कुमार गोयल ने विस्तृत योजना बनाने और सीमा सुरक्षा बलों के साथ तालमेल बिठाने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और सम्पर्क की कमियों का आकलन करने के लिए कमियों का विश्लेषण किया गया है।

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