चेन्नई , जून 17 -- मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) के महासचिव वाइको ने बुधवार को तमिनाडु में सत्तारूढ़ दल तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात की।

इस औचक मुलाकात के बाद राज्य में दोनों दलों के बीच नये गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं।

दोनों नेताओं की यह मुलाकात राज्य सचिवालय में हुई। चुनाव के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलने के सिलसिले के तहत श्री विजय खुद श्री वाइको के आवास पर भी जा चुके हैं, जिसके बाद यह उनकी दूसरी मुलाकात है। यह बैठक इस लिहाज से भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे ठीक एक रात पहले टीवीके के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री आधाव अर्जुना ने भी श्री वाइको से उनके आवास पर मुलाकात की थी।

बंद कमरे में हुई इस बातचीत का विवरण हालांकि अभी सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीति के गलियारों में इस बैठक को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टें हैं कि एमडीएमके लंबे समय से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) गठबंधन में खुद को उपेक्षित महसूस कर रही थी और वहां बने रहने से खुश नहीं थी। खुद श्री वाइको ने हालिया चुनावों में यह कहते हुए खुलकर नाराजगी जतायी थी कि उनकी पार्टी को द्रमुक के दबाव में अपने चार विधायकों को द्रमुक के चुनाव चिह्न 'उगता सूरज' पर चुनाव लड़ाना पड़ा।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए श्री वाइको ने उन चर्चाओं पर सीधे जवाब देने से परहेज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सीरकाली और कड़ैयनल्लूर से निर्वाचित उनके दो विधायक अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

इस मुलाकात को सामान्य बताते हुए श्री वाइको ने कहा कि वह मुख्यमंत्री को केवल एक पुस्तक विमोचन समारोह का निमंत्रण देने आये थे। उन्होंने इसके राजनीतिक महत्व को कमतर आंकते हुए कहा कि आगामी 27 जून को होने वाली पार्टी की आम परिषद की बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जायेगी और आगे का अंतिम फैसला वहीं लिया जायेगा।

तमिलनाडु की राजनीति में आए इस नए मोड़ ने द्रमुक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विधानसभा चुनावों के बाद टीवीके सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस समेत विभिन्न दलों ने न केवल अपना समर्थन दिया, बल्कि वे सरकार में भी शामिल हो गए। इसके साथ ही राज्य में पहली बार एक गठबंधन सरकार का गठन हुआ है। इसके अलावा दोनों वामपंथी दलों ने भी विजय सरकार को बाहर से समर्थन दिया है। ऐसे में पुराने सहयोगियों के द्रमुक का साथ छोड़कर श्री विजय कैबिनेट का हिस्सा बन जाने के बाद, अब एमडीएमके भी द्रमुक गठबंधन से नाता तोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वाइको के बेटे श्री दुरई वाइको ने पहले ही इस बात के साफ संकेत दे दिए थे।

श्री दुरई ने पहले खुलकर अपनी बेबसी जताई थी कि हालिया विधानसभा चुनाव 'दुर्भाग्य से' द्रमुक के चुनाव चिह्न पर लड़ने के कारण वे खुलकर विजय सरकार का समर्थन नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने साफ किया कि द्रमुक गठबंधन में बने रहना है या बाहर निकलना है, इसका अंतिम निर्णय 27 जून को एमडीएमके की आम परिषद की बैठक में लिया जाएगा, जहां पार्टी के भविष्य की रणनीति भी तय होगी।

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