कोच्चि , अप्रैल 07 -- केरल के कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुज़लनादन ने विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा करते हुए दावा किया है कि 2018 केरल बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और गलत निर्णयों के कारण "मानव निर्मित आपदा" बन गई।

श्री मैथ्यू ने इस संबंध में बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी से जुड़ी कथित ऑडियो क्लिप का भी हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी बारिश की चेतावनियों के बावजूद जलाशयों के जल स्तर को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित नहीं किया गया और अचानक तथा असंगठित तरीके से पानी छोड़ा गया, जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आयी। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि स्वार्थी हितों से प्रभावित व्यवस्था का परिणाम था, जिसने एक प्राकृतिक मौसमीय घटना को बड़े पैमाने की मानवीय त्रासदी में बदल दिया।

उन्होंने बिजली मंत्री से जुड़ी कथित ऑडियो क्लिप का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संकट के दौरान बांध संचालन और पानी छोड़ने के फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, इस ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता और संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जवाबदेही की मांग करते हुए श्री मैथ्यू ने बाढ़ के दौरान बांध प्रबंधन की व्यापक और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उस समय लिए गए सभी निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से आपदा के दौरान बांध प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी अपील की।उल्लेखनीय है कि 2018 की केरल बाढ़ राज्य के इतिहास की सबसे भीषण आपदाओं में से एक थी, जिसमें 480 से अधिक लोगों की मौत हुई और लगभग 10 लाख लोग विस्थापित हुए। राज्य के सभी 14 जिले प्रभावित हुए थे और अभूतपूर्व बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था, जिससे कई बांधों के गेट खोलने पड़े। विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों ने हालांकि बाढ़ का मुख्य कारण अत्यधिक और लगातार हुई बारिश को ही बताया है। कुछ विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि बांधों से पानी छोड़ने के समय और मात्रा ने कुछ क्षेत्रों में स्थिति को और खराब किया, लेकिन इसे पूरी तरह मानव निर्मित आपदा नहीं माना गया।

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