बैतूल , अगस्त 31 -- मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग द्वारा सर्किट हाउस और रेस्ट हाउस आम लोगों के लिए खोले जाने के बाद अब वन विभाग के विश्राम गृहों को भी पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराने की मांग उठने लगी है। बैतूल जिले में वन विभाग के कई विश्राम गृह प्राकृतिक और रमणीय क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें निर्धारित शुल्क और ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था शुरू होने से पर्यटकों को रात्रि विश्राम की सुविधा मिलने के साथ विभाग की आय भी बढ़ सकती है।

जिले में वन विभाग के उत्तर, दक्षिण और पश्चिम वन मंडल हैं। इनके अंतर्गत कई वन विश्राम गृह संचालित हैं। दक्षिण वन मंडल में कुकरू, सांपना, लादी, महूपानी और सांवलमेंढा, उत्तर वन मंडल में शाहपुर, कांटावाड़ी, मूढ़ा, बैतूल के अपर और लोवर रेस्ट हाउस तथा सारणी और पश्चिम वन मंडल में मोहदा, नांदा, गंवासेन और चकढ़ाना में विश्राम गृह स्थित हैं।

इनमें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कुकरू स्थित वन विश्राम गृह में ही आम पर्यटकों को ठहरने की अनुमति है। अन्य विश्राम गृह मुख्य रूप से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के फील्ड निरीक्षण के दौरान उपयोग किए जाते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब दो वर्ष से अन्य वन विश्राम गृहों में आम लोगों के ठहरने पर रोक है।

बताया जाता है कि कई बार जान-पहचान के आधार पर लोगों को इन विश्राम गृहों में ठहरने की अनुमति मिल जाती है। ऐसे मामलों में लिए जाने वाले शुल्क को विभागीय खाते में जमा करने के बजाय निजी तौर पर लिए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विभाग द्वारा औपचारिक बुकिंग व्यवस्था शुरू करने से पारदर्शिता के साथ राजस्व में भी वृद्धि हो सकती है।

इन विश्राम गृहों में कई स्थानों पर खानसामा की व्यवस्था भी है। ऐसे में पर्यटकों के लिए भोजन उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की जा सकती है, जिससे कमरे के किराए के अलावा भोजन से भी विभाग को अतिरिक्त आय हो सकती है। प्राकृतिक और वन क्षेत्रों में रात्रि विश्राम की सुविधा मिलने से जिले के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का ठहराव बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी लाभ मिल सकता है।

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