भोपाल , सितंबर 19 -- मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएसएफ) द्वारा काले हिरण और चिंकारा के शिकार के मामले में महाराष्ट्र के मुंबई निवासी आरोपी सलमान की तीसरी जमानत याचिका मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दी है। न्यायालय ने संरक्षित वन्य जीवों के शिकार को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से 20 माह से अधिक समय से जेल में निरुद्ध रहने और प्रकरण के विचारण में लग रहे समय का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। एमपीएसटीएसएफ की ओर से शासकीय अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर संरक्षित वन्य जीवों का क्रूरतापूर्वक शिकार किए जाने तथा शिकार के फोटो और वीडियो बनाए जाने को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी की जमानत याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने विचारण न्यायालय को प्रकरण की दैनिक आधार पर सुनवाई कर शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं।
वन्य जीव अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एमपीएसटीएसएफ की इंदौर इकाई ने 3 दिसंबर 2024 को भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मुंबई निवासी आरोपी सलमान को गिरफ्तार किया था। सलमान के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उसके कब्जे से 64.70 किलोग्राम काले हिरण का मांस, एक अवैध पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस तथा शिकार में प्रयुक्त टोयोटा इनोवा वाहन जब्त किया गया था।
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