चम्पावत , जुलाई 14 -- उत्तराखंड सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गंभीर रूप से घायलों के उपचार का अतिरिक्त खर्च उठाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार का खर्च वहन करने का निर्णय लिया गया है। इससे आयुष्मान योजना की सीमा से अधिक खर्च होने या आयुष्मान कार्ड न होने की स्थिति में भी पीड़ितों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि 'उत्तराखण्ड मानव-वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली-2024' के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में यदि वन्यजीव हमले में घायल व्यक्ति के उपचार पर आयुष्मान योजना की पांच लाख रुपये की सीमा से अधिक खर्च आता है तो अतिरिक्त राशि का भुगतान बिलों के सत्यापन के बाद मुख्यमंत्री राहत कोष से सीधे संबंधित अस्पताल को किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विशेष अथवा आकस्मिक परिस्थितियों में यदि पीड़ित का उपचार आयुष्मान योजना से बाहर किसी अन्य अस्पताल में कराया जाता है तो जिलाधिकारी की संस्तुति पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भुगतान किया जाएगा। वहीं, यदि पीड़ित के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है या उसका उपचार आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आता है, तो मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) के सत्यापन और जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर चिकित्सा व्यय का भुगतान किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पीड़ितों और उनके परिजनों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उपचार से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं संबंधित वन प्रभाग और अस्पताल प्रशासन मिलकर पूरी करेंगे। सभी चिकित्सा बिलों का सक्षम स्तर पर सत्यापन होने के बाद भुगतान सीधे अस्पताल के खाते में भेजा जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और उपचार में आर्थिक बाधा को समाप्त करना है।

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