नयी दिल्ली , मई 29 -- वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े रिलायंस उद्योग घराने की गुजरात स्थित अनूठी वनतारा परिसर के खिलाफ मामले को पुनः खोलने की अर्जी खारिज किए जाने का वनतरा ने स्वागत किया है।
वनतारा के सीईओ सीईओ विवान करणी ने शुक्रवार को कहा, "यह फैसला दिखाता है कि हमारा काम सही दिशा में है। वनतारा में आया हर जानवर कानूनी प्रक्रिया के तहत आया है, उसकी पूरी संवेदनशीलता के साथ देखभाल की गई है और उसे जीवनभर सुरक्षा दी जा रही है। हमारे लिए संरक्षण सिर्फ कहने की बात नहीं, बल्कि हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।"उच्चतम न्यायालय ने वनतारा के खिलाफ मामले को फिर से खोले जाने के लिए दायर नई अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा है कि जिन आरोपों को फिर से उठाने की कोशिश की गई है, वे पहले ही उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की विस्तृत जांच के दायरे में आ चुके हैं और उन पर अंतिम रूप से विचार हो चुका है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि जिन मामलों की जांच एसआईटी कर चुकी है और जिन पर न्यायालय पहले फैसला दे चुका है, उन्हें बार-बार नहीं खोला जा सकता। पीठ ने वनतारा के खिलाफ जांच, जब्ती या अभियोजन जैसी मांगों को अस्वीकार कर दिया।
आदेश में न्यायालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों से जुड़े जानवरों के हस्तांतरण वैध दस्तावेजों, आवश्यक परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी के आधार पर हुए थे। न्यायालय ने इसे गैर-व्यावसायिक और एक चिड़ियाघर से जानवरों को दूसरे चिड़ियाघर में भेजे जाने का मामला माना है।
न्यायालय ने जामनगर में वनतारा के काम की अहमियत को भी माना। आदेश में लुप्तप्राय मैकॉ पक्षियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम का जिक्र किया गया है। न्यायालय ने कहा कि जिन जानवरों को कानूनी तरीके से लाकर सुरक्षित माहौल और देखभाल दी जा रही है, उन्हें वहां से हटाना उनके हित में नहीं होगा। बल्कि वह क्रूरता के दायरे में आएगा।
याचिका दायर करने वाले करणार्थम विराम: फाउंडेशन ने न्यायालय से नौ मार्च, 2026 के आदेश को वापस लेने और वनतरा में दूसरे देश से जानवर मनाने में कथित कानूनी उल्लंघनों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियों द्वारा फिर से कराए जाने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने 27 मई के निर्णय में इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है।
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