पटना , मई 15 -- वट सावित्री व्रत के अवसर पर राजधानी पटना सहित आसपास के बाजारों में पारंपरिक पंखों की बिक्री में तेजी देखी जा रही है। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि अखंड सौभाग्य की कामना से सुहागिन महिलाएं 16 मई, शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखेगी।
वट सावित्री व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है।वट के पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी होती हैं, जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना गया है। इसमें ब्रह्मा, शिव, विष्णु एवं स्वयं सावित्री भी विराजमान रहते हैं।
पंडित राकेश झा ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं स्कंद पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत, पूजा एवं परिक्रमा के बाद भक्तिपूर्वक सत्यवान-सावित्री कथा के श्रवण से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, वंश वृद्धि, दांपत्य जीवन में सुख-शांति तथा वैवाहिक जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। वट की पूजनोपरांत अन्न, वस्त्र, ऋतु फल, मिष्ठान आदि का दान करने से सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति, गृहक्लेश तथा अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन गंगा या तीर्थ में स्नान करने से सहस्त्र गौदान एवं कोटि सुवर्ण दान के समान पुण्य फल मिलता है।
सुहागिन महिलाएं वट सावित्री पूजा की तैयारियों में जुटी हैं और वट वृक्ष की पूजा सामग्री के साथ-साथ पंखों की खरीदारी भी बड़े पैमाने पर कर रही हैं। पर्व के नजदीक आते ही पटना के प्रमुख बाजारों में रौनक बढ़ गई है और छोटे व्यापारियों से लेकर कारीगरों तक के चेहरे पर खुशी झलक रही है।
विक्रेताओं और श्रद्धालुओं के अनुसार वट सावित्री पूजा में पंखा केवल एक उपयोगी वस्तु नहीं बल्कि परंपरा और आस्था का प्रतीक है। वट वृक्ष के नीचे जब महिलाएं पूजा करती हैं, तो गर्म मौसम में पंखा उन्हें शीतलता प्रदान करता है और इसे शुभता से भी जोड़ा जाता है।
पटना के गांधी मैदान, कंकड़बाग, बोरिंग रोड, पटना सिटी, मीठापुर और दानापुर क्षेत्रों में बांस के पंखों की बिक्री में तेजी देखी जा रही है।
मीठापुर के एक विक्रेता राकेश कुमार ने बताया, "वट सावित्री के समय पंखों की मांग बहुत बढ़ जाती है। महिलाएं इसे पूजा सामग्री का जरूरी हिस्सा मानती हैं। सुबह से ही ग्राहक खरीदारी के लिए आने लगते हैं।"विक्रेता राकेश कुमार ने बताया कि साधारण बांस पंखे 20 से 50 रुपये में बिक रहे हैं, जबकि सजावटी और पूजा सेट पंखों की कीमत 80 से 150 रुपये तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से तैयार पूजा पैक 200 से 400 रुपये तक बिक रहे हैं।
यारपुर के दुकानदार राज कुमार ने बताया कि इस समय ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। महिलाएं समूह में आकर पंखा और पूजा सामग्री खरीद रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्राहक विशेष रूप से पारंपरिक पंखे पसंद कर रहे हैं।
कारीगर सुरेश महतो ने बताया, "हम लोग कई दिन पहले से ही पंखा बनाने में लग जाते हैं। यह पूरी तरह हाथ से बनाया जाता है। एक पंखा तैयार करने में समय लगता है, लेकिन पर्व के समय इसकी अच्छी बिक्री हो जाती है।" उन्होंने बताया कि बांस को पहले पतली पट्टियों में काटा जाता है, फिर उसे सुखाकर मजबूत किया जाता है। इसके बाद इन पट्टियों को आपस में बुनकर पंखे का आकार दिया जाता है। अंत में इसे पत्तों, रंगीन कागज या धागों से सजाया जाता है।
वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मीठापुर की रहने वाली सीमा देवी ने बताया कि वह हर साल पूरे श्रद्धा भाव से वट सावित्री पूजा करती हैं। उन्होंने कहा कि पंखा पूजा का जरूरी हिस्सा होता है, क्योंकि वट वृक्ष के नीचे गर्मी में पूजा के दौरान यह बहुत उपयोगी होता है।
एक अन्य श्रद्धालु अनीता कुमारी ने कहा कि यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सुहाग और परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वे हर साल इस दिन विशेष तैयारी के साथ पूजा करती हैं।
व्यापारियों का कहना है कि वट सावित्री पूजा के कारण न केवल बाजारों में रौनक बढ़ती है, बल्कि छोटे कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े परिवारों को भी आर्थिक मजबूती मिलती है। बांस उत्पादों से जुड़े कई कारीगर इस दौरान पंखा बनाने और बेचने के कार्य में जुटे रहते हैं।
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