जालंधर , सितंबर 10 -- वज्र कोर ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की निर्णायक लड़ाइयों में शामिल असल उत्तर की लड़ाई (8-10 सितंबर) की वर्षगांठ पर भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और वीरता को याद किया।

असल उत्तर के खेमकरण सेक्टर में हुई इस लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान के बड़े बख्तरबंद हमले का प्रभावी ढंग से मुकाबला करते हुए उसके पैटन टैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया और उसके आक्रमण को निर्णायक रूप से विफल कर दिया। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों और रणनीतिक रक्षात्मक मोर्चेबंदी का प्रभावी इस्तेमाल भारतीय सेना की सफलता में महत्वपूर्ण रहा। लड़ाई के बाद बड़ी संख्या में पाकिस्तानी पैटन टैंकों के नष्ट, क्षतिग्रस्त या छोड़े जाने के कारण असल उत्तर के युद्धक्षेत्र को 'पैटन नगर' के नाम से जाना जाने लगा।

इस लड़ाई के प्रमुख वीरों में कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत), का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। उन्होंने दुश्मन के टैंकों का सामना करते हुए असाधारण साहस का प्रदर्शन किया और भारी गोलीबारी के बीच लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के तहत नौ सितंबर को असल उत्तर युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसमें पूर्व सैनिकों, सेवारत सैन्यकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

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