नयी दिल्ली , अक्टूबर 25 -- सरकार अपने कानूनी भूगतानों की प्रक्रियाओं के सरलीकरण के लिए उन्हें डिजिटल भुगतान प्रणाली के साथ एकीकृत कर दिया है, जिससे सरकारी पैनल के वकीलों के बिलों के की प्राप्ति तथा भुगतान आसान हो रहा है।

केंद्रीय विधि मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इसके लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय का विधि कार्य विभाग (डीएलए) विधिक सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली (एलआईएमबीएस) को सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ एकीकृत किया है ताकि काूननी भुगतानों की प्रक्रिया को सरल किया जा सके। मंत्रालय ने कहा है कि विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 के अंतर्गत दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल शासन पर केंद्रित प्रयासों के अनुरूप अधिवक्ता शुल्क भुक्त की संपूर्ण प्रक्रिया का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। यह व्यवसाय में सुगमता और डिजिटल इंडिया की सरकार की महत्वपूर्ण पहलों का हिस्सा है।

विभाग के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग (सीएएस) ने फरवरी 2025 में एलआईएमबीएस के माध्यम से पैनल अधिवक्ता भुगतानों के लिए ई-बिल मॉड्यूल लागू किया। पहले, वकीलों को शुल्क भुगतान में कागज-पत्र की प्रक्रिया, नियम सत्यापन और वेतन एवं लेखा कार्यालय में कागजी प्रति जमा करना जरूरी था। इससे काम में देरी होती थी और कागज़ का काफी उपयोग होता था। इसके विपरीत उन्नत ई-बिल मॉड्यूल से अब विधि अधिकारियों और सरकारी पैनल में शामिल वकीलों की फीस के भुगतान की संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया में कागजी लिखा-पढ़ी की जरूत खत्म होगी और समय भी कम लगेगा। इससे मंत्रालयों और विभागों में डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग भी मजबूत होगी। नयी प्रणाली में प्रत्येक बिल के लिए एक दावा संदर्भ संख्या (सीआरएन) उत्पन्न होती है, जिससे प्रशासनिक इकाइयाँ वास्तविक समय में प्रगति पर निगरानी रख सकती हैं। आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा सत्यापित और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होने के बाद, भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जारी कर दिये जाते हैं, बिना किसी फाइल स्थानांतरण के ई-बिल मॉड्यूल में और अधिक सुधार के साथ, एलआईएमबीएस प्लेटफॉर्म पर विधि अधिकारियों और पैनल अधिवक्ताओं द्वारा तैयार किये गये बिल अब डिजिटल सत्यापन, मंजूरी और भुगतान के लिए पीएफएमएस को भी सहजता से प्रेषित किये जाते हैं। इस एकीकरण ने पूरी प्रक्रिया को कागज रहित बना दिया है तथा बिल की निगरानी किसी भी समय करना संभव हो गया है और मानवीय त्रुटि की संभावना समाप्त हुई है।

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