रायपुर , अगस्त 19 -- राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल खड़े किए और इस विषय पर खुली बहस की चुनौती दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मंगलवार रात भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी से पहले वंदे मातरम् गाने पर लोगों को गोली मार दी जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में भाजपा के लोग अंग्रेजों के लिए मुखबिरी करते थे और उनके तलवे चाटते थे। बघेल ने सवाल किया कि आजादी से पहले भाजपा के किसी नेता ने वंदे मातरम् गाया था या आंदोलन में हिस्सा लिया था क्या? भाजपा या आरएसएस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' कब गाया गया?श्री बघेल ने कांग्रेस की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के हर अधिवेशन में वंदे मातरम् गाया जाता रहा है। कांग्रेस ने ही इस गीत को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के लिए कांग्रेसियों ने लाठियां और गोलियां खाई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के बयान पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने बुधवार को पलटवार करते हुए कहा कि श्री बघेल को जानकारी ही नहीं है कि कांग्रेस का वंदे मातरम् को लेकर क्या दृष्टिकोण रहा है। श्री चंद्राकर ने सवाल किया कि कांग्रेस के अधिवेशनों में क्या पूरा वंदे मातरम् गाया गया है? उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1940 में कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम् गाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
विधायक चंद्राकर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता का मंत्र बताते हुए कहा था कि इसे गाया जाना चाहिए लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया।
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