श्रीनगर , सितंबर 11 -- कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक करा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को लेकर दिए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी वास्तविकता से पूरी तरह परे और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

श्री करा ने श्री उमर के एक दिन पहले दिए उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाना कानूनी बाध्यता है और सवाल किया था कि क्या कांग्रेस चाहती है कि कानून का पालन नहीं करने पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को जेल भेजा जाए।

श्री उमर ने गुरुवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "उन्हें (कांग्रेस को) इसे संसद में रोकना चाहिए था, लेकिन कानून बन चुका है। यह कानूनी बाध्यता है।"कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन के दौरान वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना हुई थी।

श्री करा ने अपने सहयोगी श्री उमर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की अपेक्षाएं स्पष्ट रूप से और केवल जम्मू-कश्मीर सरकार से थीं और सवाल किया कि लोगों को इस बहस में क्यों लाया गया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "जनता का इस बहस से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह मजबूती से अपना रुख रखे।"श्री करा ने सवाल किया कि जब केरल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस परेड में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों को गाने का फैसला किया था, तो क्या वहां किसी को जेल भेजा गया था।

उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस की यह अपेक्षा गलत थी कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी धर्मनिरपेक्ष और समावेशी मूल्यों के लिए मजबूती से खड़े होने में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के समान सक्षम हों। इन राज्यों में सरकारी कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम् को इसके पहले दो अंतरों तक ही सीमित रखा गया था।

श्री करा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफजेके) 2026 'रंग-ए-सिनेमा' एक "राज्य कार्यक्रम" था, जिसका संयुक्त रूप से जम्मू-कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) ने आयोजन किया था और इसका उद्घाटन स्वयं श्री उमर ने किया था।

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