बुलढाणा , अगस्त 8 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत को सही मायनों में 'विश्वगुरु' बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना अनिवार्य है।

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में पारधी समुदाय के बच्चों के लिए बने एक आवासीय विद्यालय में तीन खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि हर कोई चाहता है कि भारत विश्वगुरु बने। हालांकि, अगर देश को इस ऊंचाई को छूना है, तो समाज के हर वर्ग को समानता की भावना से जोड़ना होगा और पूरे समाज को एकसमान बनाना होगा।

भागवत ने कहा, "यह काम खुद समाज को करना होगा। इसे सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को जो करना है वह करेगी, लेकिन यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।" उन्होंने कहा, "यदि समाज में अपनेपन की भावना पैदा हो जाए, तो घुमंतु और विमुक्त जातियों की प्रगति दूर नहीं है।"सरसंघचालक ने कहा कि जिन समुदायों को आज विमुक्त या 'भटके-विमुक्त' के रूप में पहचाना जाता है, उन्होंने ऐतिहासिक रूप से ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये समुदाय बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के ज्ञान का प्रसार करने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते थे। हालांकि, समय के साथ वे समाज के हाशिए पर धकेल दिए गए।

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